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एनएसजी ने दिल्ली में 300 साल पुराने गांव पर दावे पर ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन, क्या एनएसजी किसी जमीन पर दावा कर सकता है?

एनएसजी ने दिल्ली में 300 साल पुराने गांव पर अपना कब्जा जमाने का दावा जैसे ही किया वहां के ग्रामिणों ने विरोध प्रदर्शन चालू कर दिया. चलिए जानें क्या एनएसजी किसी जमीन पर दावा कर सकता है?

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एनएसजी ने दिल्ली में 300 साल पुराने गांव पर दावे पर ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन, क्या एनएसजी किसी जमीन पर दावा कर सकता है?

क्या एनएसजी किसी जमीन पर दावा कर सकता है

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राजधानी दिल्ली से एक अहम अपडेट सामने आया है. राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) ने दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास लगभग 300 साल पुराने मेहराम नगर गाँव पर अपना दावा पेश किया है. एनएसजी ने इस गाँव के ग्रामीणों को गाँव खाली करने का आदेश दिया है. लेकिन ग्रामीणों ने गाँव छोड़ने से इनकार कर दिया है. इससे दिल्ली में एक नया विवाद छिड़ने की संभावना पैदा हो गई है.

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के नोटिस के विरोध में सभी ग्रामीण एकजुट होकर सड़कों पर उतर आए हैं. ग्रामीणों ने शनिवार और रविवार को दो दिवसीय महापंचायत का आयोजन किया है. लेकिन इस मौके पर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या एनएसजी देश की किसी ज़मीन पर दावा कर सकता है?

क्या एनएसजी किसी भूमि पर दावा कर सकता है?
क्या एनएसजी किसी ज़मीन पर दावा कर सकता है? इसका सीधा सा जवाब है 'नहीं'. एनएसजी एक सुरक्षा बल है. एनएसजी का गठन 1984 में आतंकवाद और विशेष सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए किया गया था. इसका मुख्य कार्य सुरक्षा अभियानों और वीवीआईपी सुरक्षा तक सीमित है. लेकिन एनएसजी को किसी भी ज़मीन पर कब्ज़ा करने का अधिकार नहीं है.

लेकिन, अगर केंद्र सरकार या रक्षा मंत्रालय सुरक्षा ज़रूरतों के लिए किसी क्षेत्र की पहचान करता है, तो एनएसजी या कोई अन्य सुरक्षा एजेंसी उस ज़मीन या क्षेत्र पर कब्ज़ा कर सकती है. यह सिर्फ़ सरकारी आदेशों और अधिग्रहण क़ानूनों पर निर्भर करता है, सिर्फ़ सेना की इच्छा पर नहीं.

सरकार भूमि अधिग्रहण कर सकती है ?
कानून के अनुसार, भूमि अधिग्रहण केवल कानूनी प्रक्रिया से ही संभव है. भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 (अब संशोधित अधिनियम 2013 के अंतर्गत) के तहत, सरकार सार्वजनिक या राष्ट्रीय हित में मुआवज़ा देकर भूमि अधिग्रहण कर सकती है. इसके अलावा, अगर ज़मीन पहले रक्षा मंत्रालय या किसी अन्य सरकारी विभाग को आवंटित की गई थी और उसके रिकॉर्ड में दर्ज थी, तो वह ज़मीन ग्रामीणों के लिए विवादास्पद हो सकती है.

मेहरम मामला क्या है?
माना जा रहा है कि मेहरम नगर मामला भी इसी श्रेणी में आता है. गाँव का एक बड़ा हिस्सा ऐतिहासिक रूप से वायु सेना और रक्षा प्रतिष्ठानों के लिए आरक्षित था. अब जब एनएसजी ने ज़मीन पर दावा कर दिया है, तो ग्रामीणों को लग रहा है कि उनके अधिकारों का हनन हुआ है. सर्वोच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय ने फैसला दिया है कि बिना सरकारी अधिग्रहण के किसी भी एजेंसी द्वारा ज़मीन पर दावा करना गैरकानूनी है. इसके अलावा, अगर ज़मीन सरकारी रिकॉर्ड में संरक्षित या सार्वजनिक भूमि के रूप में सूचीबद्ध है, तो इससे वहाँ रहने वाले लोगों के मालिकाना हक़ प्रभावित हो सकते हैं, ऐसा बताया गया है.

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