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Uttarakhand SIR: नाम, उम्र, परिवार की जानकारी में गलतियां... अधिकारियों ने बताई 19 लाख वोटर्स को नोटिस भेजने की वजह

शिकायत निवारण केंद्र के अधिकारियों ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक कई लोगों का जरूरी दस्तावेज पेश न कर पाना है क्योंकि कुछ लोगों ने बाढ़, आग या अन्य दुर्घटनाओं में दस्तावेज खो दिए हैं.

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Uttarakhand SIR: नाम, उम्र, परिवार की जानकारी में गलतियां... अधिकारियों ने बताई 19 लाख वोटर्स को नोटिस भेजने की वजह

उत्तराखंड एसआईआर के दौरान 19 लाख से भी ज्यादा लोगों को भेजे गए नोटिस (Image Source: IANS)

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उत्तराखंड में चल रहे वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में 19.3 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं. नाम, उम्र और परिवार की जानकारी में गलतियों को ठीक करवाने के लिए लोग शिकायत निवारण केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं. इसे लेकर कांग्रेस हमलावर हो गई है और एसआईआर में अनियमितताओं का आरोप लगा रही है.

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार देहरादून के रायपुर शिकायत निवारण केंद्र पर कई मतदाता एसआईआर के लिए पहुंचे. उन्होंने बताया कि नाम की स्पेलिंग में गलती, गलत उम्र और सरकारी दस्तावेजों में परिवार की जानकारी में अंतर के कारण नोटिस मिले हैं. विशुका शेरपा ने बताया कि उनके परिवार को नोटिस इसलिए मिला क्योंकि उनके पिता का नाम वोटर लिस्ट में होने के बावजूद अलग-अलग रिकॉर्ड में उनके नाम की स्पेलिंग अलग-अलग थी. अलीशा ने कहा कि छोटी-छोटी गलतियों के लिए भी नोटिस भेजे जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि नाम के एक अक्षर में भी अंतर होने पर नोटिस भेजे गए हैं. 

भूपेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि वोटर लिस्ट में उनके और उनकी मां की उम्र में सिर्फ 15 साल का अंतर होने की वजह से उन्हें नोटिस मिला है. उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत केंद्र के कई चक्कर लगाने के बावजूद गलती ठीक नहीं की गई. शिकायत निवारण केंद्र के अधिकारियों ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक कई लोगों का जरूरी दस्तावेज पेश न कर पाना है क्योंकि कुछ लोगों ने बाढ़, आग या अन्य दुर्घटनाओं में दस्तावेज खो दिए हैं.

अधिकारियों ने बताया कि स्पेलिंग में अंतर के मामले बड़ी संख्या में सामने आए हैं, ये अंतर इसलिए हुए क्योंकि कुछ दस्तावेजों में नाम हिंदी में थे और कुछ में अंग्रेजी में या फिर सरनेम न होने और पिता या पति के नाम की स्पेलिंग में अंतर के कारण ऐसे मामलों की संख्या बढ़ी है.

अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि 14 जुलाई को प्रकाशित ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 71.33 लाख वोटर्स थे. उन्होंने कहा कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान पाई गई विभिन्न विसंगतियों के कारण लगभग 19.3 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं, जबकि ‘मैपिंग’ से संबंधित मुद्दों के लिए 5.5 लाख और नोटिस भी भेजे गए हैं. 

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने एसआईआर प्रक्रिया में गंभीर खामियों का आरोप लगाते हुए दावा किया कि कुछ मामलों में जिन लोगों को वोटर का नाम हटाने के लिए प्रस्तावक के तौर पर दिखाया गया, वे अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिले. उन्होंने कहा कि पार्टी ने मैदानी इलाकों की कई विधानसभा सीटों से सामने आए ऐसे मामलों के बारे में निर्वाचन आयोग को जानकारी दी है. हालांकि, कांग्रेस ने ऐसे किसी भी प्रस्तावक का नाम सार्वजनिक नहीं किया है और न ही कोई ऐसा सबूत दिया है जिसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सके.

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