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चमोली ही नहीं सिलक्यारा टनल में भी हुआ था ऐसा ही हादसा... फंस गए थे 41 मजदूर, कहानी 17 दिनों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन की

Chamoli Tunnel Accident: उत्तराखंड के चमोली जिले में हुए टनल हादसे में फंसे 22 मजदूरों में से 20 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. वहीं 7 मजदूरों की मौत हो गई है. इस हादसे ने उत्तरकाशी के सिलक्यारा टनल हादसे की याद फिर से ताजा कर दी है. आइए जानते हैं कि सिलक्यारा टनल हादसा कैसे हुआ था. हादसे में

चमोली ही नहीं सिलक्यारा टनल में भी हुआ था ऐसा ही हादसा... फंस गए थे 41 मजदूर, कहानी 17 दिनों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन की

सांकेतिक फोटो (इमेज क्रेडिट - AI)

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  • उत्तराखंड के चमोली जिले में हुए टनल हादसे में 7 मजदूरों की मौत हो गई है 
  • वहीं 14 मजदूर घोयल हो गए हैं और एक मजदूर लापता बताया जा रहा है 
  • फंसे 22 मजदूरों में से 20 को रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए सुरक्षित निकाला गया 
  • टनल में अचानक पानी भरने और मलबा आने के कारण यह हादसा हुआ

Chamoli Tunnel Accident: उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन टनल हादसे में कुल 7 मजदूरों की मौत हो गई है. वहीं 14 के करीब मजदूर घायल हो गए हैं और एक मजदूर लापता बताया जा रहा है. जिले के मायापुर-पीपलकोटी में टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (THDC) की ओर से टनल निर्माण का काम चल रहा है. उत्तराखंड में यह पहली बार नहीं है, जब टनल निर्माण के समय हादसा हुआ हो. इससे पहले भी 2023 में सिलक्यारा टनल में भी हादसा हुआ था और 41 मजदूर टनल के अंदर फंस गए थे. 

कितनी लंबी है चमोली टनल? जिसमें हुआ हादसा 

चमोली जिले में बन रही पीपलकोटी टनल जल विद्युत परियोजना का हिस्सा है. टनल का निर्माण अलकनंदा नदी पर किया जा रहा है. टनल की लंबाई करीब 3.5 किमी बताई जा रही है. डीएम गौरव कुमार ने बताया कि कल शाम 6:30 बजे टनल भारी मात्रा में मलबा और पानी भर गया, जहां निर्माण कार्य चल रहा था, जिस कारण यह हादसा हुआ. अचानक पानी और मलबा टनल में कहां से इसकी अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है. 

कैसे भरा चमोली टनल में पानी?

पुलिस के मुताबिक घटना के समय टनल में 22 मजदूर काम कर रहे थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लैंडस्लाइड के बाद अचानक पानी और मलबा आने से काम कर रहे सभी मजदूर अंदर ही फंस गए. फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है. सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि NDRF SDRF की टीमों स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं. 

क्या था सिलक्यारा टनल हादसा?

नवंबर 2023 में उत्तराखंड के उत्तकाशी में निर्माणाधीन सिलक्यारा टनल का धंसने के कारण काम कर रहे 41 मजदूर अंदर ही फंस गए थे. 17 दिनों तक लगातार चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था. टनल का निर्माण चारधाम प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा था. फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए नॉर्वे और थाईलैंड की स्पेशल टीमों की भी मदद गई थी. यह टनल हादसा देश भर में चर्चा का विषय बना था. चमोली हादसे ने सिलक्यारा टनल हादसे की याद एक बार फिर ताजा कर दी. 

कितने किमी लंबा है सिलक्यारा टनल?

सिलक्यारा टनल का निर्माण करीब 12000 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है. इसकी लंबाई करीब 890 किमी है. हादसे के समय टनल में फंसे मजदूरों को पाइप के जरिए लगातार ऑक्सीजन, पानी, सूखे मेवे सहित अन्य खाद्य सामग्री, बिजली, दवाइयां आदि पहुंचाई जा रही थी. वहीं चमोली टनल में फंसे मजदूरों को बार निकालने के लिए सेना और ITBP की टीमें भी लगाई गई हैं. सीएम ने कहा कि फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है. 

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