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इन दिनों एक शादी की चर्चा खूब जोर-शोर से हो रही है. गाजियाबाद में हुई यह शादी अपने आप में अनोखी है, जहां दुल्हन को बैलगाड़ी में विदा किया गया. इस शादी का कार्ड भी बेहद हैरान कर देने वाला है. जहां एक ओर समाज में दहेज प्रथा को लेकर तमाम बहसें होती हैं, वहीं सुरविंदर ने अपने कदम से मिसाल पेश की है.
गाजियाबाद (Ghaziabad)के रईसपुर गांव के पर्यावरण कार्यकर्ता सुरविंदर किसान की शादी इन दिनों सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है. यह शादी न केवल सादगी और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा भी बन रही है. सुरविंदर किसान ने पारंपरिक दहेज प्रथा को दरकिनार करते हुए अपनी शादी में महज 11 हजार पौधों की मांग की. यह पहल पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है. जहां एक ओर समाज में दहेज प्रथा को लेकर तमाम बहसें होती हैं, वहीं सुरविंदर ने अपने कदम से मिसाल पेश की है.
दुल्हन बैलगाड़ी से विदा
शादी में एक और अनोखी पहल यह रही कि दुल्हन की विदाई बैलगाड़ी से की गई. यह पहल ग्रामीण परंपराओं को संजोने और सादगी को बढ़ावा देने के लिए की गई. बैलगाड़ी से विदाई का दृश्य सभी के दिलों को छू गया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया.
10 अनोखे वचन बने चर्चा का विषय
सुरविंदर किसान ने शादी के निमंत्रण पत्र में 10 अनोखे वचन लिखे, जो पर्यावरण संरक्षण, समाज सेवा और सादगी को बढ़ावा देने पर आधारित हैं. इन वचनों में पौधे लगाने, जल संरक्षण, फिजूल खर्च से बचने और रक्तदान करने जैसी बातें शामिल हैं. शादी के मौके पर रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया, जहां कई मेहमानों ने रक्तदान करके इस अनूठी पहल में अपना योगदान दिया. यह कदम समाज सेवा के प्रति सुरविंदर की जागरूकता को दर्शाता है.
समाज को मिला सादगी और प्रेरणा का संदेश
सुरविंदर किसान की यह शादी मौजूदा समय में फिजूल खर्च और दिखावे की शादियों के बीच एक मिसाल बनकर उभरी है. उन्होंने साबित कर दिया कि सादगी और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देकर भी शादी को खास बनाया जा सकता है.
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