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Harvard University: अमेरिका सरकार ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से सभी बचे हुए सरकारी अनुबंध रद्द करने का फैसला लिया है. इसके साथ ही विदेशी छात्रों की जानकारी समय पर न देने पर हार्वर्ड की छात्र नामांकन की अनुमति भी छीन ली गई है.
Harvard University: अमेरिकी सरकार और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बीच चल रहे तनातनी अब खुलकर सामने आ गया है. ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड को बड़ा झटका देते हुए कहा है कि अब वह उसके साथ कोई नया या पुराना सरकारी अनुबंध नहीं रखेगा. इसके तहत करीब 100 मिलियन डॉलर के अनुबंध खत्म किए जा रहे हैं. इसके साथ ही सभी एजेंसियों से कहा गया है कि वे भविष्य के लिए दूसरे संस्थानों को चुने. डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हार्वर्ड बहुत पैसा ले चुका है, लेकिन अब तक विदेशी छात्रों की पूरी सूची नहीं दी है. उन्होंने कहा कि यह समझना जरूरी है कि इनमें से कितने छात्र देश के लिए खतरा हो सकते हैं. इसके बाद प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए हार्वर्ड की SEVP मान्यता रोक दी. हालांकि, इस फैसले को एक अदालत ने फिलहाल रोक दिया है.
दरअसल, सरकार का कहना है कि हार्वर्ड ने विदेशी छात्रों की पूरी जानकारी नहीं दी थी. इस वजह से होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने विश्वविद्यालय को एक नोटिस भेजा और 72 घंटे में जरूरी दस्तावेज जमा करने को कहा. जब ऐसा नहीं हुआ, तो विश्वविद्यालय की विदेशी छात्रों को नामांकित करने की अनुमति रोक दी गई.
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने सरकार की कार्रवाई को गलत बताया है. विश्वविद्यालय के प्रमुख डॉ. एलन गार्बर ने कहा कि यह सब राजनीति से प्रेरित है और इससे हजारों छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है. उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा, चाहे सरकार किसी भी पार्टी की हो.
न्यू यॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट कर अनुसार अब सभी सरकारी एजेंसियों को 6 जून तक अपने-अपने हार्वर्ड से जुड़े अनुबंधों की लिस्ट भेजनी होगी. ट्रंप ने यह भी कहा है कि वे हार्वर्ड को मिलने वाले 3 अरब डॉलर के ग्रांट को रोककर उसे व्यापारिक स्कूलों को दे सकते हैं. बहरहाल, यह मामला सिर्फ एक विश्वविद्यालय से नहीं जुड़ा है, बल्कि यह अमेरिका में शिक्षा की आजादी और सरकार की सख्ती के बीच एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है.
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