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अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध तेज होने से मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जिसका सीधा असर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है.
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती जंग ने पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव का माहौल बना दिया है. इस युद्ध की तपिश सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने दुनिया भर के बाजार को हिलाकर रख दिया है. जंग तेज होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक भारी उछाल आया है. तेल के दामों में लगी इस आग के बीच भारत सरकार ने भी एक बेहद अहम और बड़ा कदम उठाया है.
मोदी सरकार ने डीजल और हवाई ईंधन यानी एटीएफ के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में तगड़ी बढ़ोतरी कर दी है. सरकार की तरफ से बुधवार (15 जुलाई 2026) को जारी आधिकारिक आदेश में साफ कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए इस भारी उछाल के कारण टैक्स बढ़ाने का यह फैसला लेना पड़ा है.
सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स को लगभग दोगुना कर दिया है. पहले डीजल पर प्रति लीटर 8.5 रुपये टैक्स लगता था, जिसे अब बढ़ाकर सीधे 15.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. इसी तरह, हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर विंडफॉल टैक्स को 7.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर अब 14.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.
सरकार द्वारा बढ़ाई गई टैक्स की ये नई दरें गुरुवार (16 जुलाई) से तुरंत प्रभाव से लागू हो चुकी हैं. हालांकि, इस बीच पेट्रोल का निर्यात करने वालों के लिए थोड़ी राहत की खबर है, पेट्रोल पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती की गई है. पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 4 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 2.50 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है.
यह कोई पहली बार नहीं है जब सरकार ने इस तरह का कदम उठाया हो. इससे पहले भी जब-जब वैश्विक हालात बिगड़े हैं और कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं, सरकार ने ऐसे फैसले लिए हैं. अभी हाल ही में जुलाई के महीने में जब अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव कुछ समय के लिए थमा था, तब सरकार ने पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स को बढ़ाया था, जबकि डीजल और एटीएफ पर इसे कम कर दिया था. लेकिन अब 16 जुलाई से बदलते वैश्विक हालातों को देखते हुए इसे दोबारा बढ़ाना पड़ा है.
इस खबर को सुनने के बाद हर किसी के मन में पहला सवाल यही उठता है कि क्या देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ जाएंगे? क्या आम जनता की जेब पर इसका बोझ पड़ेगा? तो इसका सीधा और साफ जवाब है- नहीं. दरअसल, विंडफॉल टैक्स आम जनता पर नहीं, बल्कि तेल का निर्यात करने वाली कंपनियों पर लगाया जाने वाला एक विशेष अतिरिक्त टैक्स होता है.
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो देसी कंपनियां मुनाफे के चक्कर में सारा तेल बाहर बेचने लगती हैं. सरकार यह टैक्स इसलिए लगाती है ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की कोई कमी न हो और कंपनियां देश के बाहर तेल बेचकर जरूरत से ज्यादा मुनाफा न कमा सकें. इसलिए सरकार के इस फैसले का देश के अंदर पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
गुरुवार को देश के चार प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पूरी तरह स्थिर रहीं. दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है. कोलकाता में पेट्रोल 113.48 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है. वहीं, आर्थिक राजधानी मुंबई में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये और डीजल की 97.83 रुपये है, जबकि चेन्नई में पेट्रोल 107.78 रुपये और डीजल 99.56 रुपये प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है.
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