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लखनऊ की एक अदालत ने शुक्रवार को एक विवाहित जोड़े को 2020 में माता-पिता सहित अपने परिवार के छह सदस्यों की हत्या के लिए मौत की सजा सुनाई है.
Death Penalty: लखनऊ की एक अदालत ने शुक्रवार को एक विवाहित जोड़े को 2020 में माता-पिता सहित अपने परिवार के छह सदस्यों की हत्या के लिए मौत की सजा सुनाई है. अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने अजय सिंह और उनकी पत्नी रूपा सिंह को अपने परिवार के छह सदस्यों की हत्या के लिए सजा सुनाई, जिसमें भाई अरुण सिंह, उनकी पत्नी, दो बच्चे और माता-पिता शामिल थे. दंपति को पिछले साल 16 दिसंबर को दोषी ठहराया गया था.
क्या थी घटना?
अजय सिंह की बहन दुर्गावती उर्फ गुड्डी सिंह ने मई 2020 में बंथरा थाने में शिकायत की थी. उसने आरोप लगाया कि उसके भाई अजय सिंह, उसकी पत्नी रूपा सिंह और उसके नाबालिग बेटे ने साजिश रचकर उसके पिता अमर सिंह, मां राम दुलारी, भाई अरुण सिंह, भाभी राम सखी, भतीजे सौरभ और भतीजी सारिका की चाकू से हत्या कर दी और उन्हें गोली भी मार दी.
गुड्डी सिंह ने आरोप लगाया कि उसका भाई उनके पिता से पैसे की मांग करता था और उसे डर था कि पिता जमीन बेचकर सारा पैसा अपने भाई और भाभी को दे देंगे. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह और 31 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए, जिससे सजा में मदद मिली.
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तिहरे हत्याकांड में 9 लोगों को आजीवन कारावास
एक अन्य घटनाक्रम में, उड़ीसा उच्च न्यायालय ने बुधवार को 2016 के तिहरे हत्याकांड मामले में नौ लोगों की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया. 2021 में रायगडा जिले की एक अदालत ने जादू-टोना करने के संदेह में दो महिलाओं सहित एक परिवार के तीन सदस्यों की हत्या के लिए उन्हें मौत की सजा सुनाई थी. पीड़ित और हत्यारे दोनों ही रायगढ़ जिले के पुट्टासिंह पुलिस थाने के अंतर्गत कितुम गांव के निवासी थे. न्यायमूर्ति एस के साहू और न्यायमूर्ति आर के पटनायक की खंडपीठ का मानना था कि इस मामले में मृत्युदंड अनुचित है और आजीवन कारावास उचित होगा.
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