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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात बेकाबू हो चुके हैं, जहां सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में अब तक 30 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 200 लोग घायल हैं.
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस वक्त हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. वहां की जनता और सुरक्षाबलों के बीच हुई हिंसक झड़पों में अब तक 30 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि करीब 200 लोग गंभीर रूप से घायल हैं. PoK के इन हालातों पर भारत में भी गहरी चिंता और नाराजगी देखी जा रही है.
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने इस स्थिति पर दुख जताते हुए गुरुवार (11 जून 2026) को कहा कि आज पाकिस्तान के कब्जे वाले हिस्से में आम लोगों पर भयंकर जुल्म ढाया जा रहा है और कई लोग मारे गए हैं. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति (UNHRC) से अपील की है कि वे तुरंत वहां जाएं और देखें कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के नागरिकों को किन मुश्किलों और अत्याचारों का सामना करना पड़ रहा है.
#WATCH | Srinagar, J&K: On protests in PoK, National Conference President, Farooq Abdullah says, "This state is in a difficult situation. The part that is with Pakistan is where oppression is happening today. Many people have been martyred there. Full details of the news are not… pic.twitter.com/gEAea7Gla3
— ANI (@ANI) June 11, 2026
वहीं दूसरी तरफ, श्रीनगर में 'एसोसिएशन ऑफ टेरर विक्टिम्स' की चेयरपर्सन तस्लीमा अख्तर की अगुवाई में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ प्रदर्शन किया गया. तस्लीमा अख्तर ने सीधे पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर निशाना साधते हुए कहा कि निहत्थे नागरिकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाना बेहद शर्मनाक है. लोग सिर्फ अपने बुनियादी हक मांग रहे थे. उन्होंने साफ कहा कि PoK के लोग खुद को अकेला न समझें, वे हमारे जम्मू-कश्मीर का ही हिस्सा हैं और हम उनके न्याय के लिए संयुक्त राष्ट्र को एक ज्ञापन भी सौंपेंगे.
#WATCH | Srinagar, J&K: Members of the 'Association of Terror Victims', led by Chairperson Tasleema Akhtar, held a peaceful protest against the killing of civilians by the Pakistan Army in Pakistan-occupied Kashmir (PoK). pic.twitter.com/oo6gtaF6SV
— ANI (@ANI) June 11, 2026
इस पूरे मामले पर भारत के विदेश मंत्रालय ने भी बेहद सख्त रुख अपनाया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने PoK में पुलिस और सेना की इस कार्रवाई को क्रूरता की हद बताया. भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि वह इस मानवाधिकार उल्लंघन के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराए.
भारत सरकार का मानना है कि PoK में यह हिंसा कोई अचानक नहीं हुई है, बल्कि यह वहां की जनता के दमन और उनके संसाधनों की लगातार हो रही लूट का नतीजा है. भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर अपना स्टैंड साफ किया कि साल 1994 के संसदीय प्रस्ताव के मुताबिक, गिलगित-बाल्टिस्तान सहित पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान को अपने अवैध कब्जे वाले इन इलाकों को तुरंत खाली कर देना चाहिए.
ये पूरा विवाद तब भड़का, जब वहां की सरकार ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) नाम के एक बड़े नागरिक संगठन पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी. ये संगठन लंबे समय से PoK में आर्थिक बदहाली, महंगाई और राजनीतिक अधिकारों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन चला रहा था.
स्थानीय प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर इस संगठन को गैरकानूनी घोषित कर दिया था. इसके बाद रविवार को रावलकोट शहर में माहौल उस समय पूरी तरह बिगड़ गया, जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में एक स्थानीय व्यापारी की मौत हो गई. आरोप है कि पुलिस की गोलीबारी में उस व्यापारी की जान गई.
रावलकोट के शीर्ष नागरिक अधिकारी (कमिश्नर) सरदार वाहिद खान के मुताबिक, व्यापारी की मौत के बाद गुस्साए JAAC समर्थक भारी तादाद में उस अस्पताल के बाहर जमा हो गए, जहां शव को रखा गया था. इसके बाद सुरक्षाबलों और आम जनता के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया.