भारत
15 अगस्त को अलास्का में होने वाली यह बैठक न केवल अमेरिका और रूस के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है. भारत ने इस मुलाकात पर अपन रुख स्पष्ट कर दिया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही भारत के खिलाफ टैरिफ वॉर छेड़ दिया हो, लेकिन भारत अपने शांति के संदेश पर कायम है. दरअसल, ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात तय है. भारत ने इस बारे में एक बयान जारी किया है. यह मुलाकात यूक्रेन में चल रहे युद्ध को खत्म करने और शांति लाने की दिशा में एक कदम हो सकती है. भारत ने साफ कहा है कि आप कुछ भी करें, युद्ध रुकना चाहिए. यह बयान प्रधानमंत्री मोदी के उस रुख के अनुरूप है, जिसमें वे अक्सर कहते रहे हैं कि यह युद्ध का दौर नहीं है.
15 अगस्त को अलास्का में होने वाली यह बैठक न केवल अमेरिका और रूस के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है. यूक्रेन में चार साल से चल रहे युद्ध ने लाखों लोगों को विस्थापित किया है और हज़ारों लोगों की जान ली है. ऐसे समय में, भारत को उम्मीद है कि यह बैठक शांति की राह खोल सकती है.
भारत का आधिकारिक रुख
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि भारत 15 अगस्त 2025 को अलास्का में अमेरिका और रूसी संघ के बीच होने वाली बैठक का स्वागत करता है. यह बैठक यूक्रेन में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने और शांति की संभावना को खोलने का वादा करती है. बयान में आगे कहा गया है कि भारत हिंसा को रोकने और कूटनीति के माध्यम से समाधान निकालने में मदद करने वाले किसी भी प्रयास का समर्थन करेगा.
यह युद्ध का युग नहीं है - प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान को दोहराया है जो उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिया है. यह युद्ध का दौर नहीं है. भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस शिखर सम्मेलन का समर्थन करता है और ज़रूरत पड़ने पर शांति प्रयासों में योगदान देने के लिए तैयार है.
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