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झारखंड ही नहीं UP में हुई भर्ती परीक्षा में भी TDPL ने किया खेल...दर्ज है केस, जानें कौन सा था एग्जाम?

जिस TDPL कंपनी की ओर से 2014 से लेकर अब तक आयोजित परीक्षाओं को झारखंड सरकार ने रद्द किया है. उसने यूपी में हुई भर्ती परीक्षा में खेल किया था. वहीं एक अन्य मामलों में कंपनी के दोनों प्रमोटरों पर केस भी दर्ज है और दोनों जमानत पर हैं.

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झारखंड ही नहीं UP में हुई भर्ती परीक्षा में भी TDPL ने किया खेल...दर्ज है केस, जानें कौन सा था एग्जाम?

सांकेतिक तस्वीर  (इमेज क्रेडिट - Freepik)

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  • TDPL कंपनी के खिलाफ यूपी में भी मामला दर्ज हैं. 
  • कंपनी पर परीक्षा में धांधली करने का आरोप है 
  • कंपनी ने रिजल्ट सार्वजनिक नहीं किया था. 
  • चयनित अभ्यर्थियों की लिस्ट भी नहीं जारी की थी 

झारखंड सरकार ने TDPL कंपनी की ओर से 2014 से अब तक आयोजित की गई सभी भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया है. इसमें JSSC-CGL और झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा सहित कई एग्जाम शामिल हैं. इस कंपनी ने झारखंड में ही नहीं यूपी में भी हुई भर्ती परीक्षा में खेल किया, जिस कारण सैकड़ों अभ्यर्थी अभी तक अधर में फंसे हैं और मामला हाईकोर्ट में लंबित है. आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है.   

यूपी की किस परीक्षा में TDPL ने किया खेल?

2021-22 में, TDPL उन तीन फर्मों में से एक थी, जिन्होंने UP विधानसभा और विधान परिषद सचिवालयों में प्रशासनिक पदों के 186 रिक्तियों के लिए भर्ती परीक्षा का आयोजन किया था. इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने परीक्षा में TDPL से जुड़ी अनियमितताओं को चौंकाने वाला बताया था, जिससे इस फर्म को लेकर कई सलाव उठे थे.

अभी लंबित है कोर्ट में मामला

हाईकोर्ट ने कहा था कि परीक्षा के आयोजन में पारदर्शिता नहीं बरती गई. नतीजे कभी सार्वजनिक नहीं किए गए, चुने गए उम्मीदवारों की सूची नहीं जारी की गई और कुल आवेदकों की संख्या भी अज्ञात है. बाद में यूपी विधान परिषद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच को रद्द कर दिया, लेकिन यह मामला अभी भी हाईकोर्ट में लंबित है और परीक्षा में शामिल सैकड़ों अभ्यर्थी अधर में फंसे हैं. 

किसने दी थी TDPL को परीक्षा की जिम्मेदारी?

कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार यूपी विधानसभा में भर्ती का काम ब्रॉडकास्टिंग इंजीनियरिंग एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज (BECIL) को सौंपा गया था, जो केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की फर्म है. BECIL ने भर्ती प्रक्रिया आयोजित करने के लिए TDPL को काम सौंपा था. बताया जाता है कि जब से हाईकोर्ट ने विधानसभा भर्ती मामले की सुनवाई शुरू की है, तब से कंपनी को राज्य में किसी भी भर्ती परीक्षा को आयोजित करने का जिम्मा नहीं दिया गया.

tdpl

 

कब बनीं थी TDPL कंपनी, कौन है मालिक?

जुलाई 2010 में राम बीर और सत्य पाल ने मोहम्मद तारिक के साथ मिलकर TDPL कंपनी की शुरुआत की थी. साल 2013 में मोहम्मद तारिक फर्म से अलग हो गया था. मार्च 2025 को खत्म होने वाले फाइनेंशियल ईयर के लिए अगस्त 2025 को कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, राम बीर सिंह और सत्य पाल ही इसके दो प्रमोटर हैं. दोनों के पास 50-50 परसेंट हिस्सेदारी है, जिसमें 5,000 इक्विटी शेयर शामिल हैं.

कितनी हैं TDPL कंपनी की नेटवर्थ?

कंपनी में करीब 965 कर्मचारी काम करते हैं और सभी पुरूष हैं यानी की कंपनी में एक भी महिला कर्मचारी नही है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार 2024-25 में TDPL का कुल ऑपरेशन से रेवेन्यू 19.62 करोड़ रुपये था, जबकि 2023-24 में यह 5.23 करोड़ रुपये था.

 2024-25 में टैक्स के बाद कंपनी का कुल प्रॉफिट 48.54 लाख रुपये था. कंपनी की अधिकृत पूंजी 16 लाख रुपये थी. राम बीर और सत्य पाल, दोनों ने 2024-25 में 18.60 लाख रुपये की सैलरी ली थी. 

यूपी में दर्ज है दोनों पर मामले 

UP पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार राम बीर और सत्य पाल भर्ती से जुड़े एक अन्य मामले में जमानत पर हैं. दोनों पर मार्च 2021 में केस दर्ज किया गया था. दोनों को अप्रैल 2021 को गिरफ्तार किया  गया था और उनके पास से भारी मात्रा में कैश बरामद किया गया था. 

राम बीर और सत्य पाल चार अन्य फर्मों में भी डायरेक्टर हैं. इसमें स्माइलिंग डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, LKO फूड एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड, KSR इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड और ड्रीमलॉजिक्स इन्फोटेक लिमिटेड.

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