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पश्चिम बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री के तौर पर सुवेंदु अधिकारी के नाम पर मुहर लग गई है. वह 9 मई को रविद्रनाथ टैगोर की जयंती के मौके पर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं.
पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी होंगे. बीजेपी हाईकमान ने उनके नाम पर मुहर लगा दी है. बंगाल के पहले बीजेपी सीएम बनने जा रहे सुवेंदु अधिकारी के कोई डिप्टी सीएम नहीं होंगे. वह 9 मई को रविंद्रनाथ टैगोर की जयंती के मौके पर मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे.
साल 2007 में वह नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ चले आंदोलन का चेहरा बने. इस आंदोलन ने उन्हें पूरे राज्य में पहचान दिलाई. वह ममता बनर्जी के सबसे करीबी और भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे. हालांकि, साल 2020 में वह तृणमूल कांग्रेस से बीजेपी में आए. 2021 के चुनाव में नंदीग्राम सीट पर उन्होंने ममता बनर्जी को चुनाव हराया. 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने ममता को भबानीपुर सीट से हराने के साथ-साथ मुख्यमंत्री की कुर्सी भी छीन ली.
सुवेंदु अधिकारी ने चुनावी हलफनामे में 85.87 लाख रुपये की संपत्ति घोषित की है. एफिडेविट में उन्होंने बताया है कि वो पूरी तरह से डेट फ्री हैं. उनके पास करीब 24 लाख रुपये की चल संपत्ति और 61 लाख रुपये की अचल संपत्ति है. अचल संपत्ति में जमीन, प्लॉट और घर शामिल हैं. सुवेंदु अधिकारी के पास अपनी कोई गाड़ी नहीं है. न ही उनके पास सोना-चांदी है. एफिडेविट के मुताबिक, उनकी कमाई का जरिया बतौर विधायक मिलने वाली सैलरी, सांसदी का पेंशन और बिजनेस है. उन्होंने साल 2024-25 में अपनी आय 17.38 लाख रुपये बताई है.
सुवेंदु अधिकारी पोस्ट ग्रेजुएट हैं. चुनावी हलफनामे में दी गई जानकारी के मुताबिक, साल 2011 में उन्होंने रबिंद्र भारती यूनिवर्सिटी से MA की डिग्री ली है.
सुवेंदु अधिकारी राजनीतिक परिवार से आते हैं. उनके पिता शिशिर अधिकारी मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री रह चुके हैं. वह पश्चिम बंगाल की कांठी लोकसभा सीट से तीन बार सांसद रहे. वह तीन बार विधायक भी रह चुके हैं. सुवेंदु अधिकारी के तीन भाई हैं. इनमें से दो सौमेंदु अधिकारी और दिब्येंदु अधिकारी भी राजनीति में एक्टिव हैं. सौमेंदु अधिकारी कांठी सीट से लोकसभा सांसद हैं, वहीं दिब्येंदु अधिकारी तमलुक से सांसद और कांठी दक्षिण से विधायक रह चुके हैं.
सुवेंदु अधिकारी ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस के साथ की थी. 1995 में वह कांठी में कांग्रेस के पार्षद चुने गए थे. साल 2000 में वह टीएमसी में शामिल हो गए. साल 2020 में टीएमसी से इस्तीफा देकर वह बीजेपी में शामिल हो गए.