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सुप्रीम कोर्ट ने जब पूछा कि क्या जांच एसआईटी कर रही है तो एसजी ने कहा कि एसआईटी का गठन सच्चाई का पता लगाने के लिए किया गया था और अब यूपी पुलिस ही जांच कर रही है.
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (20 जुलाई, 2026) को उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा है कि क्या यूपी पुलिस के बजाय जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) बनाया जा सकता है. कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस पर यूपी सरकार से निर्देश लेने को कहा है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने एसजी मेहता से कहा कि वह यूपी सरकार से निर्देश लें कि क्या स्थानीय पुलिस के बजाय एसआईटी को इस मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जिसने प्राथमिकी दर्ज होने से पहले पूरे मामले की जांच की थी.
कोर्ट के निर्देश पर यूपी सरकार ने पेश की स्टेटस रिपोर्ट
शुरुआत में एसजी तुषार मेहता ने कहा कि पहले के आदेश का पालन करते हुए राज्य सरकार ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है. उन्होंने बताया कि जांच चल रही है और आठ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है. कोर्ट ने उनसे जब पूछा कि क्या जांच एसआईटी कर रही है तो एसजी ने कहा कि एसआईटी का गठन सच्चाई का पता लगाने के लिए किया गया था और अब यूपी पुलिस ही जांच कर रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने 13 जुलाई को उत्तर प्रदेश पुलिस को इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था. बेंच ने गौर किया कि एसआईटी में दो सीनियर आईएएस अधिकारी और लखनऊ के पुलिस महानिरीक्षक भी शामिल थे और कोर्ट ने पूछा कि क्या वे निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य जांच कर सकते हैं.
मामले को राजनीतिक रंग न दें, सीजेआई की चेतावनी
सुनावई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता को भी चेतावनी दी है कि मामले का राजनीतिकरण न हो. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'बस एक बात का ध्यान रखें, इस मामले को राजनीतिक रंग न दें. अदालतें राजनीति की जगह नहीं हैं. यह अपराध का एक साधारण मामला है. हम सिर्फ यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि इसकी ठीक से जांच हो.'
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की सीबीआई जांच की मांग
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में तीन याचिकाएं दाखिल हुई हैं, जिनमें से एक याचिकाकर्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी हैं. उन्होंने इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से करवाने की मांग की है. एक और याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने कहा कि उनकी जनहित याचिका में कहा गया है कि जब मंदिर बनाया गया था, तब सभी से चंदा मांगा गया था. अब हम चाहते हैं कि उन रसीदों को सुरक्षित रखा जाए और अपलोड किया जाए.
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह की ओर से दायर तीसरी याचिका में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग के अलावा, मंदिर न्यास के पूरे वित्तीय कामकाज का फॉरेंसिक ऑडिट कराने का भी अनुरोध किया गया है.
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