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हाईकोर्ट ने भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर बताया था. साथ ही आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के दशकों पुराने उस आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसमें मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार की नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी.
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसमें विवादित भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर बताया गया है. मुस्लिम पक्ष इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है, जिस पर सोमवार (13 जुलाई, 2026) को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जल्दी सुनवाई पर सहमति जताई है.
मुस्लिम याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट हुजेफा अहमदी और निजाम पाशा पेश हुए और उन्होंने सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच से अनुरोध किया कि याचिकाकओं पर तत्काल सुनवाई की जरूरत है.
सीजेआई ने दिया मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई का भरोसा
सीजेआई सूर्यकांत ने भी याचिकाकर्ताओं को जल्दी सुनवाई का भरोसा दिलाया है. उन्होंने याचिकाकर्ताओं के वकीलों से कहा कि वह याचिकाओं में मौजूद कमियों को दूर कर लें और उनकी याचिकाओं को जल्द ही किसी बेंच के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा.
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले में क्या?
15 मई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में आदेश दिया था और एमपी के धार जिले के भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर बताया था. कोर्ट ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के दशकों पुराने उस आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसमें मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार की नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी. हाईकोर्ट ने कहा था कि केंद्र और एएसआई भोजशाला परिसर के प्रशासन और प्रबंधन के बारे में फैसला ले सकते हैं.
मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की है. हिंदू पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में ‘कैविएट’ (पूर्व सूचना याचिका) दायर की है जिसमें कहा गया है कि भोजशाला परिसर विवाद मामले में हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ किसी भी अपील पर उनकी बात सुने बिना कोई आदेश जारी नहीं किया जाए.
भोजशाला परिसर को लेकर क्या है विवाद?
हिंदू समुदाय भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी की इस इमारत को कमाल मौला मस्जिद कहता है. विवादित परिसर एएसआई के संरक्षण में है. 7 अप्रैल, 2003 को एएसआई ने एक व्यवस्था बनाई थी, जिसके तहत मंगलवार और वसंत पंचमी को भोजशाला परिसर में हिंदू पूजा करते हैं और मुसलमान शुक्रवार को नमाज अदा कर सकते हैं. हालांकि, इस साल 23 जनवरी को शुक्रवार के दिन वसंत पंचमी थी, जिसकी वजह से नमाज और पूजा को लेकर हिंदू-मुस्लिम पक्षों में विवाद हो गया और दोनों सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए.
सुप्रीम कोर्ट ने तब दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद आदेश दिया था कि हिंदुओं को सूर्यास्त तक पूजा करने और मुसलमानों को उसी दिन दोपहर में 1 बजे से 3 बजे तक नमाज अदा करने की अनुमति है.
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