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Supreme Court On Freebies: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से चलाई जा रही मुफ्त योजनाओं पर सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि मुफ्त में राशन और पैसा मिलने की वजह से लोग काम नहीं करना चाहते हैं.
इस वक्त देश की राजनीति में मुफ्त योजनाओं की बाढ़ सी आई हुई है. दिल्ली चुनाव में भी बीजेपी, आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस तीनों ने ही महिलाओं के खाते में कैश ट्रांसफर का वादा किया था. केंद्र और राज्य सरकारों की मुफ्त राशन योजना (Free Ration) के साथ लाडली बहन, किसान सम्मान निधि और ऐसी दूसरी योजनाओं से खाते में सीधे रकम ट्रांसफर हो रही है. ये योजनाएं चुनावी सफलता भले ही दे रही हों, लेकिन सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इन पर सख्त टिप्पणी की है.
सुप्रीम कोर्ट ने शहरी क्षेत्रों में बेघर लोगों के आश्रय के अधिकार से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए फ्रीबीज पर सख्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि लोगों को मुफ्त में राशन मिल रहा है और खाते में बिना काम किए पैसा आ रहा है. इस वजह से लोग काम नहीं करना चाह रहे हैं.
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सुप्रीम कोर्ट ने फ्रीबीज पर की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने शहरी बेघरों से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी की है. दो जजों की बेंच ने कहा कि हम आपकी चिंता समझते हैं कि बेघर लोगों के लिए आपकी तकलीफ है. पीठ ने कहा, 'दुर्भाग्य से लोग काम नहीं करना चाह रहे हैं, क्योंकि चुनावों से पहले फ्री योजनाओं का ऐलान होता है. लोगों को मुफ्त में राशन और पैसा मिल रहा है.' कोर्ट ने बेघर लोगों के बारे में कहा कि बेहतर होगा कि इन लोगों को मुख्यधारा में लाया जाए और राष्ट्र निर्माण से जोड़ा जाए.
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