भारत
सुप्रीम कोर्ट ने एक 12 साल के बच्चे की मनोदशा देखकर अपना ही 10 महीने पुराना एक आदेश पलट दिया. इस दौरान जजों ने फैसले को लेकर गलती मानी और आदेश पलट दिया.
न्यायालय में बैठे न्यायाधीश कोई भी फैसला दोनों पक्षों की लंबी बहस, सबूत की मौजूदगी के बाद भी बहुत ही सोच समझकर लेते हैं, लेकिन जो फैसला लेते है. वह अटल होता है, लेकिन देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट हैरान कर देने वाला कदम उठाया. सुप्रीम कोर्ट ने एक 12 साल के बच्चे की कहानी सुनकर 10 महीने पहले लिया गया अपना ही फैसला पलट दिया. सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले लिए गये फैसले पर अफसोस जताते हुए माफी भी मांगी. इसके बाद 12 साल के बच्चे की कस्टडी पिता से लेकर मां को सौंप दी गई.
पिता के पास पहुंचा बच्चा कुछ ही दिनों में बुरी तरह से बीमार हो गया. उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी. यह मामला फिर से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां बच्चे की हालत देख सुप्रीम कोर्ट में बैठे जजों का दिल पसीज गया. न्यायधिश ने बच्चे की हालत देख अपने 10 महीने पुराने फैसले को बदल दिया. उन्होंने बच्चे की कस्टडी को पिता से लेकर मां को सौंप दिया. इसके साथ ही उन्होंने माना की बच्चे की कस्टडी पिता को देकर उनसे गलती हुई थी. उस समय जजों ने दंपति के वकीलों की अलग अलग दलील को सुनकर फैसला सुना दिया था. उनके इस आदेश की वजह से ही आज 12 साल के बच्चे का इलाज वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सा विभाग में चल रहा है. अपनी गलती का सुधारते हुए आदलत ने अब बच्चे की कस्टडी मां को सौंप दी. हालांकि बच्चे के पिता को उससे मिलने का अधिकार दिया है.
दरअसल मामला बच्चे के माता पिता की शादी 2011 में हुई थी. इसके 2 साल बाद ही दोनों में अनबन हो गई और अलग रहने लगे. इसके बाद दोनों में तलाक हो गया. बच्चे मां के साथ रह रहा था. महिला ने तलाक के 4 साल बाद ही किसी अन्य व्यक्ति से शादी कर ली. 2022 में बच्चे का पिता केरल फैमिली कोर्ट पहुंचा. यहां उन्होंने कहा कि उसकी पत्नी अपने दूसरे पति के साथ मलेशिया जा रही है. केरल हाई कोर्ट और पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी याचिका स्वीकार कर ली. यहां लंबी चौड़ी बहस के बाद जजों ने बच्चे की कस्टडी पिता को सौंप दी.
पिता के पास जाने के बाद से अपने 12 साल के बच्चे की हालत बिगड़ती देख मां ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की. इसमें उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश की वजह से उनके बच्चे का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ गया है. मां ने बच्चे की मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट भी दिखाई कि वह चिंता और डर से ग्रस्त हो गया है. उसे बीमारी का खतरा बढ़ गया है.
अदालत ने बच्चे की मां की पुनर्विचार याचिका पर अपना फैसला बदल दिया. कोर्ट ने बच्चे की रिपोर्ट और उसकी हालत को देख अपना 10 महीने पहले लिया गया फैसला बदल दिया. कोर्ट ने बच्चे की कस्टडी पिता से लेकर मां को सौंप दी. इसके साथ ही पिता को बच्चे से मिलने का अधिकार दिया.
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