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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इन कार्यवाहियों से जुड़े रिकॉर्ड संबंधित हाईकोर्ट्स को भेजेगा और कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई अंतरिम सुरक्षा, हाईकोर्ट्स में कार्यवाही लंबित रहने तक जारी रहेगी.
बुलडोजर एक्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (16 जुलाई, 2026) को उन अवमानना याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिनमें दावा किया गया कि कोर्ट के 2024 के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए ये कार्रवाई की गई हैं. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से संबंधित हाईकोर्ट जाने को कहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट जाने को कहा
14 नवंबर, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई की आलोचना करते हुए संपत्तियों को गिराने के मामले में देशभर के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे. आज की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. एस. मोहना की बेंच ने कहा कि तथ्यों के आधार पर कई ऐसे सवाल हैं, जिन पर विचार किए जाने की जरूरत है. कोर्ट ने कहा कि वह इन कार्यवाहियों से जुड़े रिकॉर्ड संबंधित हाईकोर्ट्स को भेजेगा और कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई अंतरिम सुरक्षा, हाईकोर्ट्स में कार्यवाही लंबित रहने तक जारी रहेगी.
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट्स से 4 महीने में मामला निपटाने को कहा
बेंच ने यह भी कहा कि पक्षकारों को अंतरिम आदेशों में संशोधन के लिए हाईकोर्ट में अनुरोध करने की भी आजादी होगी और हाईकोर्ट ऐसी याचिकाओं पर स्वतंत्र रूप से फैसला लेंगे. कोर्ट ने हाईकोर्ट्स से अनुरोध किया है कि वह इन याचिकाओं का निपटारा चार महीने के अंदर करने की कोशिश करें.
सोमनाथ में मस्जिद गिराए जाने के खिलाफ याचिका
सोमनाथ में मस्जिदें गिराए जाने से जुड़े मामले में सीनियर एडवोकेट हुजैफा अहमदी पेश हुए, उन्होंने कहा कि इस मामले में सार्वजनिक भूमि पर कोई अतिक्रमण नहीं था. उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का गंभीर उल्लंघन है. उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों ने कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करते हुए कार्रवाई की.
एडवोकेट हुजैफा अहमदी की दलील पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'मुख्य शिकायत यह प्रतीत होती है कि प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है. आप (अधिकारी) कहेंगे कि प्रक्रिया का पालन किया गया है और दूसरा पक्ष इससे इनकार करेगा. क्यों न हम यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दें और हाईकोर्ट को इस पर निर्णय लेने दें.'
नेताओं के आह्वान पर कार्रवाई किए जाने के लगाए आरोप
महाराष्ट्र के अवमानना मामले में पेश सीनियर एडवोकेट सी. यू. सिंह ने दावा किया कि कई बार स्थानीय नेता बुलडोजर कार्रवाई का आह्वान करते हैं और उसके बाद एक्शन ले लिया जाता है. उन्होंने कहा कि ऐसे कई मामले हैं, जहां इस तरह की कार्रवाई स्पष्ट रूप से दंडात्मक कार्रवाई के रूप में की जाती है. उन्होंने दलील दी कि अगर कोर्ट को लगता है कि अवमानना नहीं हुई है तो याचिका खारिज की जा सकती है. उन्होंने कहा, 'अगर सुप्रीम कोर्ट अपने ही फैसले के लिए खड़ा नहीं होता है, तो मुझे यह कहते हुए खेद है...'
उनकी इस दलील पर जस्टिस बागची ने ने कहा, 'फैसले को कानून नहीं माना जा सकता. निर्देश कुछ शर्तों और सीमाओं के साथ दिए गए हैं. ये निर्देश सिर्फ उन वैधानिक अधिकारों की पुन: पुष्टि के रूप में हैं, जो पहले से मौजूद हैं.' जज ने कहा, 'यह फैसला इसलिए दिया गया क्योंकि कोर्ट की अंतरात्मा को झकझोर दिया गया था. निर्दोष भाव की धारणा का आधार था... हां, जब अधिकारियों और अवैध अतिक्रमणकारियों की मिलीभगत से कानून का शासन कमजोर होता है, तब बुलडोजर का इस्तेमाल जरूरी हो सकता है.'
बुलडोजर एक्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए थे?
13 नवंबर, 2024 को संपत्तियों को गिराने के मामले में दिशा-निर्देश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कार्यपालिका न्यायाधीश की भूमिका नहीं निभा सकती, किसी आरोपी को दोषी घोषित नहीं कर सकती और उसका घर नहीं गिरा सकती. कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि किसी भी संपत्ति को गिराने की कार्रवाई कारण बताओ नोटिस जारी किए बिना नहीं की जानी चाहिए. यह नोटिस संबंधित स्थानीय नगर निकाय कानूनों में निर्धारित अवधि के अनुसार या नोटिस की तामील की तारीख से 15 दिन के भीतर, इनमें से जो अवधि बाद में समाप्त हो, उस समय तक प्रभावी होना चाहिए.
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