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Supreme Court ने जजों की नियुक्ति में देरी पर उठाए सवाल, मोदी सरकार को सुनाई खरी-खरी

कोर्ट का कहना है कि कॉलेजियम द्वारा स्वीकृति के बावजूद अभी तक केंद्र सरकार द्वारा जजों की नियुक्ति नहीं की गई है जिससे पूरा सिस्टम बिगड़ा हुआ है.

Supreme Court ने जजों की नियुक्ति में देरी पर उठाए सवाल, मोदी सरकार को सुनाई खरी-खरी
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डीएनए हिंदी: देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के बीच एक बार फिर बड़ा टकराव सामने आया है. जजों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार का सिस्टम सही से काम नहीं कर रहा है.  सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि कॉलेजियम ने जजों की सिफारिश कर दी है, इसके बावजूद मोदी सरकार (Modi Government) ने अभी तक जजों की नियुक्ति नहीं की है. 

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने जजों की नियुक्ति पर सुनवाई के दौरान कहा कि लगता है कि सरकार राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) के रद्द किए जाने से नाखुश है. केंद्र सरकार जजों की नियुक्ति पर बैठी रहेगी तो सिस्टम कैसे काम करेगा. हमें न्यायिक पक्ष पर फैसला करने को विवश ना करें. अदालत ने सरकार के प्रतिनिधि यानी अटॉर्नी जनरल को कहा है कि वे सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए सलाह दें कि देश के कानून का पालन किया जाए.

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क्या है कॉलेजियम प्रणाली 

अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह कॉलेजियम क्या है? आपको बता दें कि कॉलेजियम प्रणाली न्यायाधीशों द्वारा ही न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रथा है और इसे लेकर सरकार और शीर्ष अदालत में कुछ मतभेद हैं. केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजुजू ने पिछले महीने कहा था कि देश के लोग कॉलेजियम प्रणाली से खुश नहीं हैं और संविधान की भावना के अनुसार न्यायाधीशों की नियुक्ति करना सरकार का काम है. ऐसे में कॉलेजियम सिस्टम से स्वीकृति के बावजूद अभी तक जजों की नियुक्ति नहीं हो सकती है. 

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पूर्व CJI ने कॉलेजियम को बताया था बेस्ट

आपको बता दें कि देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश यू. यू. ललित ने अपने एक बयान में कहा था कि कॉलेजियम प्रणाली में कुछ भी गलत नहीं है. उन्होंने कहा था कि कॉलेजियम प्रणाली यहां मौजूद रहेगी और यह एक स्थापित मानदंड है, जहां न्यायाधीश ही न्यायाधीश को चुनते हैं जिससे न्यायपालिका की गरिमा स्थापित रहती है जो कि आज के वक्त की मूल आवश्यकता है.

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