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हमें कहीं एडमिशन भी नहीं मिलेगा... CBSE की पॉलिसी के खिलाफ SC पहुंचे गल्फ देशों के 30 छात्र

27 मार्च, 2026 को सीबीएसई ने एक नोटिस जारी किया और बताया कि गल्फ देशों के छात्रों को स्पेशल असेसमेंट स्कीम के जरिए को मार्क्स दिए जाएंगे. ये मार्क्स उनके क्वाटरली, हाफ ईयरली और प्री बोर्ड एग्जामिनेशन के आधार पर होंगे. 

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हमें कहीं एडमिशन भी नहीं मिलेगा... CBSE की पॉलिसी के खिलाफ SC पहुंचे गल्फ देशों के 30 छात्र

सुप्रीम कोर्ट ने गल्फ छात्रों की याचिका पर सीबीएसई को भेजा नोटिस (Image Source: ANI)

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (8 जुलाई, 2026) को गल्फ देशों के कक्षा-12 के छात्रों की याचिका पर सीबीएसई को नोटिस भेजा है. ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध की वजह से पश्चिम एशिया में खराब हालातों के चलते सीबीएसई ने कुछ विषयों की परीक्षा रद्द कर दी थी और स्पेशल असेसमेंट स्कीम के तहत छात्रों को मार्क्स दिए गए थे. गल्फ देशों के कुछ छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके स्कीम का विरोध किया है.

सऊदी, कतर, यूएई और कुवैत के छात्रने पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार याचिकाकर्ताओं का कहना है कि स्कीम के तहत जो कार्यप्रणाली अपनाई गई, उसकी वजह से उन्हें कम मार्क्स मिले हैं, जिसका असर उनके करियर पर पड़ेगा. वह अच्छी यूनिवर्सिटी में एडमिशन नहीं ले सकेंगे. यह याचिका 30 छात्रों की ओर से दाखिल की गई है, जिनमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, ओमान और बहरीन के छात्र शामिल हैं.

जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने उनकी याचिका पर सीबीएसई को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है. कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को भी नोटिस की कॉपी भेजी है और कोर्ट की मदद के लिए उन्हें नियुक्त किया है.

स्पेशल असेसमेंट स्कीम से हुआ नुकसान, याचिका में दावा
सीबीएसई ने गल्फ देशों में युद्ध के चलते सुरक्षा कारणों से कई परीक्षाएं रद्द कर दी थीं. 27 मार्च, 2026 को सीबीएसई ने एक नोटिस जारी किया और बताया कि स्पेशल असेसमेंट स्कीम के जरिए छात्रों को मार्क्स दिए जाएंगे. ये मार्क्स उनके क्वाटरली, हाफ ईयरली और प्री बोर्ड एग्जामिनेशन के आधार पर होंगे. 

छात्रों को सता रहा किस बात का डर?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनको असेसमेंट में कम मार्क्स मिले हैं, जिसकी वजह से उन्हें डायरेक्ट एडमिशन स्टूडेंट्स अब्रॉड और चिल्ड्रन ऑफ इंडियन वर्कर्स इन गल्फ कंट्रीज (CIWG) स्कीम के जरिए एडमिशन लेने में दिक्कत होगी. इसके लिए कम से कम 75 प्रतिशत मार्क्स जरूरी हैं. उनका यह भी कहना है कि इंजीनियरिंग टेस्ट जेईई पास करने वाले छात्रों को भी एडमिशन में दिक्कत हो सकती है क्योंकि स्पेशल असेसमेंट स्कीम की वजह से उनके मार्क्स कम हुए हैं. याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि कुछ छात्रों को अच्छे एकेडमिक परफॉर्मेंस के बावजूद फेल कर दिया गया या कुछ को कंपार्टमेंट कैटेगरी में डाल दिया.

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