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Agnipath Scheme: अग्निपथ से जुड़ी तीन याचिकाओं पर SC में आज सुनवाई, केंद्र सरकार ने भी की ये मांग

Agnipath Scheme: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अग्निपथ योजना पर रोक लगाने की मांग की गई है. केंद्र सरकार की ओर से भी इसे लेकर कैविएट दाखिल की गई है.  

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Agnipath Scheme: अग्निपथ से जुड़ी तीन याचिकाओं पर SC में आज सुनवाई, केंद्र सरकार ने भी की ये मांग

सुप्रीम कोर्ट

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डीएनए हिंदीः अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में तीन याचिकाएं दाखिल की गई है. इन याचिकाओं में इस योजना पर रोक लगाने की मांग की गई है. याचिका में यह भी मांग की गई है कि सेना में जो युवा नौकरी पाने की प्रक्रिया में हैं उन पर यह योजना लागू नहीं होनी चाहिए. कोर्ट इस मामले में आज सुनवाई करेगा. बता दें कि देश के कई शहरों में इस योजना को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए थे. 

3 सदस्यीय बेंच करेगी मामले की सुनवाई
इस मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय बेंच करेगी. इसमें जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, सूर्यकांत और ए एस बोपन्ना शामिल हैं. बता दें कि अग्निपथ योजना के तहत थलसेना में भर्ती प्रक्रिया 1 जुलाई से शुरू हो गई है. वहीं वायुसेना में इससे पहले 24 जून जबकि नौसेना में 25 जून से शुरू हो गई. इस भर्ती में 17.5 वर्ष से 21 वर्ष तक के उम्मीदवार शामिल हो सकेंगे. इस साल के लिए राहत देते हुए आयु सीमा बढ़ाकर 23 साल कर दी गई है.   

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सुप्रीम कोर्ट में एक के बाद एक दाखिल हो रही इन याचिकाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी कैविएट दाखिल कर चुकी है. किसी पक्ष की तरफ से कैविएट दाखिल होने के बाद मामले में कोई भी आदेश उस पक्ष को सुने बिना नहीं दिया जाता है. ऐसे में अब केंद्र को इस बात की आशंका नहीं होगी कि सुप्रीम कोर्ट अग्निपथ योजना पर रोक का एकतरफा आदेश दे देगा. सुप्रीम कोर्ट में यह मामला जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, सूर्यकांत और ए एस बोपन्ना की 3 सदस्यीय बेंच के सामने सुनवाई के लिए लगा है. सुप्रीम कोर्ट में यह याचिकाएं हर्ष अजय सिंह, मनोहर लाल शर्मा और रविंद्र सिंह शेखावत की ओर से दाखिल की गई हैं.

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केंद्र सरकार ने दाखिल की कैविएट
इस मामले को लेकर केंद्र सरकार की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की गई है. इसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार का पक्ष सुने बिना इस मामले में कोई फैसला नहीं दे सकेगा. बता दें कि एक वादी द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए एक कैविएट आवेदन दायर किया जाता है कि उसका पक्ष सुने बिना उसके खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किया जाए. मनोहर लाल शर्मा ने योजना को गलत तरीके से लागू किया गया और देशहित के विरुद्ध बताते हुए रद्द करने की मांग की है.  

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