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सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को निर्देश, 30 अप्रैल से पहले पूर्व सैनिकों को दें OROP का एरियर

Supreme Court on OROP: वन रैंक वन पेंशन के तहत एरियर जारी करने के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दो टूक निर्देश दिए हैं.

सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को निर्देश, 30 अप्रैल से पहले पूर्व सैनिकों को दें OROP का एरियर

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डीएनए हिंदी: वन रैंक वन पेंशन के बकाया एरियर पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार 30 अप्रैल के पहले-पहले लाभार्थियों का एरियर चुका दे. इससे पहले सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डी वीआई चंद्रचूड़ ने सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट जमा किए जाने पर नाराजगी जताई और इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया. उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल भी पूछा कि यह रिपोर्ट तो आदेशों के अमल में लाने को लेकर है इसमें आखिर गोपनीय क्या हो सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश देते हुए कहा है कि 30 अप्रैल तक ऐसे लोगों को वन रैंक वन पेंशन के तहत एरियर दिए जाएं जो पेंशनर हैं या फिर वीरता पुरस्कारों के विजेता. इसके अलावा, 70 साल से ज्यादा उम्र वाले पेंशनरों को 30 जून 2023 तक और बाकी के पेंशनरों को 30 अगस्त 2023, 30 नवंबर 2023 और 28 फरवरी 2023 या उससे पहले बराबर किश्तो में एरियर जारी किया जाए.

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सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पर भड़के CJI
इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हमें सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में जवाब देने के चलन पर रोक लगाने की आवश्यकता है. यह मूल रूप से निष्पक्ष न्याय की बुनियादी प्रक्रिया के विपरीत है. उन्होंने सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दिए जाने पर पूछा कि यह आदेशों को अमल में लाने को लेकर है, इसमें गोपनीय क्या हो सकता है?

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वन रैंक वन पेंशन का मतलब एक समान रैंक और समान अवधि की सेवा के लिए समान पेंशन मिलनी चाहिए. इसमें रिटायरमेंट की तारीख के कोई मायने नहीं रह जाते. यानी अगर किसी अधिकारी ने 1985 से 2000 तक 15 साल फोर्स में सेवा दी और एक अन्य अफसर 1995 से 2010 तक सेवा में रहे तो दोनों को एक बराबर पेंशन मिलेगी. इससे 25 लाख पूर्व सैनिकों को फायदा होगा.

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