भारत
सुप्रीम कोर्ट ने शादी का झांसा देकर रेप से जुड़े एक मामले में FIR खारिज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि आरोप लगाने वाली महिला ने FIR में झूठी कहानियां गढ़ी थीं.
शादी का झांसा देकर रेप से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने FIR खारिज कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिला की तरफ से दाखिल की गई FIR महज़ झूठ का एक पुलिंदा है. कोर्ट ने कहा कि महिला अपने आरोपों के पक्ष में एक भी सबूत पेश नहीं कर पाई है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने टिप्पणी की कि इस मामले में सुनवाई करना न्याय की विडंबना होगी.
कोर्ट ने पाया कि महिला के बयानों में विसंगति है. FIR में मनगढंत बातें लिखी गई हैं जिन्हें शिकायतकर्ता सब्सटैंशिएट भी नहीं कर पाई हैं. बेंच ने कहा है इस मामले में आरोपी के खिलाफ जांच और सुनवाई करना न्याय की विडंबना होगी और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा.
कोर्ट ने कहा, 'शिकायतकर्ता 30 साल की पढ़ी-लिखी महिला हैं.2021 के FIR में उन्होंने एक सेक्शुअल एन्काउंटर का जिक्र किया है. जबकि, 2022 के FIR में ऐसी 4-5 घटनाओं का जिक्र है, जबकि सभी की तारीख 2021 से पहले की है. यह असंभव है कि 2021 में शिकायत करते वक्त महिला को ये घटनाएं याद नहीं थीं या इन घटनाओं का जिक्र करना वो भूल गईं.'
ये मामला तेलंगाना का है. तेलंगाना हाईकोर्ट ने आरोपी के FIR रद्द करने की मांग को खारिज कर दिया था. जिसके बाद आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया.सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि महिला ने इसी तरह की शिकायत ओस्मानिया यूनिवर्सिटी के एक असिस्टेंट प्रोफेसर के खिलाफ भी की थी. कोर्ट ने पाया कि महिला ने फोन पर मैसेज में ये बात स्वीकार की थी कि वो लोगों को मैनिपुलेट कर रही थी. महिला की चैट हिस्ट्री के आधार पर कोर्ट ने कहा, "एक समय पर महिला कह रही है कि उसके लिए अगला बंदा फंसाना मुश्किल नहीं है. फिर तुरंत कह रही है कि वो आरोपी के साथ अपना टाइम वेस्ट नहीं करेगी और अपने अगले विक्टिम पर समय लगाएगी. वो ये भी कह रही है कि वो लोगों को इतना इरिटेट कर देगी कि वो उसे छोड़ देंगे और फिर वो खुशी-खुशी नए व्यक्ति को फंसा लेगी. उसने ये भी कहा कि वो आरोपी का इस्तेमाल कर रही थी. इन चैट्स से महिला का एक बिहेवियरल पैटर्न सामने आता है. ऐसा लगता है कि वो चालाकी और विंडिक्टिव बर्ताव से अपना काम निकालती है."
कोर्ट ने पाया कि आरोपी को जब पता चला महिला का सेक्शुअल बिहेवियर अग्रेसिव है और ऑब्सेसिव है तो शादी के अपने फैसले से पीछे हट गया. इसमें कुछ गलत नहीं है. कोर्ट ने कहा, 'इसलिए, अगर ये मान भी लिया जाए कि आरोपी ने शादी का वादा पूरा नहीं किया, तो ये नहीं कहा जा सकता है कि उसने शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाए. या उसने शिकायतकर्ता के SC/ST समुदाय के होने की वजह से उसके साथ यौन अपराध किया.'
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