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भूख हड़ताल खत्म करने को तैयार सोनम वांगचुक, सरकार के सामने रखीं 3 बड़ी शर्तें

Sonam Wangchuk Protest Update: देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और नीट (NEET) पेपर लीक की जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर सोनम वांगचुक पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं.

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भूख हड़ताल खत्म करने को तैयार सोनम वांगचुक, सरकार के सामने रखीं 3 बड़ी शर्तें

भूख हड़ताल कर रहे हैं सोनम वांगचुक (Image Source- ANI)

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पर्यावरण कार्यकर्ता और सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपना अनशन खत्म करने का संकेत दिया है. लेकिन उन्होंने साफ किया है कि वह इसे बिना किसी शर्त के नहीं छोड़ेंगे. वांगचुक ने सरकार के सामने तीन बड़ी शर्तें रखी हैं और कहा है कि अगर इनमें से कोई एक मांग भी मान ली जाती है, तो वह अपना 23 दिनों से चला आ रहा अनशन तोड़ देंगे. 

अपनी सेहत और मौजूदा हालात को देखते हुए सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि वह 20 जुलाई को अपना यह अनशन खत्म करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते उनकी शर्तों पर ध्यान दिया जाए.

क्या हैं सोनम वांगचुक की 3 शर्तें?

  1. शिक्षा व्यवस्था में सुधार की अलख जगा रहे वांगचुक ने अपनी पहली और सबसे प्रमुख शर्त यह रखी है कि सरकार देश के एजुकेशन सिस्टम में हो रही हालिया गड़बड़ियों और NEET जैसे बड़े पेपर लीक मामलों की पूरी जिम्मेदारी ले.
  2. उनकी दूसरी शर्त यह है कि या तो उन्हें और कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं को संसद तक जाने की अनुमति दी जाए, जहां विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और बड़े नेता उन्हें यह पक्का भरोसा दिलाएं कि वे संसद के भीतर देश की शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाएंगे.
  3. तीसरी शर्त के तौर पर उन्होंने कहा कि अगर उनकी नाजुक सेहत या सुरक्षा कारणों की वजह से उनका संसद तक पहुंचना मुमकिन नहीं हो पाता है, तो अलग-अलग पार्टियों के सांसद और जिम्मेदार नेता खुद सफदरजंग अस्पताल आएं. वे यहां आकर उन्हें और देश की जनता को यह विश्वास दिलाएं कि वे इस गंभीर मुद्दे को सदन में जरूर उठाएंगे.

अस्पताल प्रशासन पर 'अवैध हिरासत' का बड़ा आरोप

इस बीच सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने वहां के प्रशासन और स्थानीय पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि अस्पताल में इलाज के नाम पर उन्हें एक तरह से 'अवैध हिरासत' में रखा गया है. वांगचुक के मुताबिक, अस्पताल परिसर के अंदर उनकी आजादी को पूरी तरह से छीन लिया गया है. 

 

उन्होंने लिखा कि न तो उन्हें कहीं आने-जाने दिया जा रहा है, न ही अपनी बात खुलकर रखने की आजादी मिल रही है. यहां तक कि बाहरी लोगों या मीडिया से बातचीत करने और संचार करने के उनके मौलिक अधिकारों पर भी प्रशासन ने पूरी तरह पाबंदी लगा रखी है.

दूसरी तरफ डॉक्टरों की टीम का कहना है कि 23 दिनों से भूखे रहने के कारण वांगचुक का शरीर बेहद कमजोर हो चुका है, इसलिए इन्फेक्शन से बचाने और उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कुछ पाबंदियां लगाना जरूरी हो जाता है.

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