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Ujjain Mahakal Sawari: महाकाल की सवारी में इस बार हथिनी श्यामू नहीं शामिल होगी. आज होने वाली दूसरी सवारी में श्यामू के स्थान पर सुमा हथिनी महाकाल की सवारी बनेगी. श्यामू के बीमार होने के कारण उसे इस बार सवारी में नहीं शामिल किया गया.
Ujjain Mahakal Sawari: उज्जैन महाकाल मंदिर से जुड़ी 46 सालों की पुरानी परंपरा इस बार टूट गई. आज होने वाली बाबा महाकाल की सवारी में मादा हाथी श्यामू नहीं शामिल होगी. श्यामू वर्षों से सावन महीने में होने वाली महाकाल की सवारी में शामिल होती रही है. श्यामू के नहीं शामिल होने से इस बार सवारी में कई बदलाव किए गए हैं. आज शाम 4 बजे से होने वाली सवारी में श्यामू की जगह सुमा हथिनी महाकाल की सवारी बनेगी.
पशु चिकित्सकों के अनुसार श्यामू बीमार है. ऐसे में उसे इस बार सवारी से दूर रखा गया है. उसके स्थान पर सुमा हथिनी इस बार महाकाल की सवारी में शामिल होगी. मंदिर प्रशासन से इसकी पूरी तैयारी कर ली है. हाल ही में श्यामू के स्वास्थ्य की जांच की गई थी, जिसकी रिपोर्ट मंदिर प्रशासन ने मांगी थी. रिपोर्ट आने बाद मंदिर समिति ने श्यामू को सवारी में नहीं शामिल करने का फैसला किया.
सरमन गिरी महाराज का परिवार महाकाल की सवारी से 1980 से जुड़ा रहा. साल 1980 से 2016 तक श्यामू की मां रामू महाकाल की सवारी बनती रही. 2016 में उसकी मौत के बाद श्यामू सवारी में शामिल होने लगा. इस बार अस्वस्थ होने के कारण श्यामू महाकाल की सवारी नहीं बन पाई. ऐसे में इस परिवार की 46 वर्षों से चली आ रही सवारी सेवा की परंपरा भी टूट गई.
उज्जैन के श्री राम मंदिर निर्मोही अखाड़े की मादा हाथी सुमा आज होने वाली महाकाल की दूसरी सवारी में शामिल होगी. श्रावण मास की दूसरी सवारी मंदिर से आज शाम करीब 4 बजे नगर भ्रमण के लिए निकलेगी. सवारी में बाबा महाकाल को चांदी की पालकी में बैठाया जाता है. वह चंद्रमौलेश्वर और मनमहेश रूप में नगर भ्रमण करते हैं. पहली सवारी 3 अगस्त को निकली थी.
बताया जाता है कि श्यामू के पैर में कुछ परेशानी थी, जिसकी जांच के लिए डाक्टरों से ब्लड सैंपल लिया था. इस पर श्यामू के मालिक सरमन गिरी ने आरोप लगाते हुए कहा था कि यह समस्या उसे बचपन से है. उन्होंने कहा था कि उसे उज्जैन से दूर भेजने और महाकाल की सवारी में नहीं शामिल करने की साजिश की जा रही है.
मंदिर प्रशासन ने सरमन गिरी को पत्र लिखकर श्यामू की रिपोर्ट मांगी थी और कहा था कि यदि वह पूरी तरह स्वस्थ्य होता है, तो उसे सवारी में शामिल किया जाएगा. अब रिपोर्ट आने के बाद पशु चिकित्सकों की सलाह पर मंदिर प्रशासन से उसे सवारी में नहीं शामिल करने का फैसला किया है.
बताया जाता है कि वर्षों पुरानी परंपरा के तहत श्रावण महीने में मकाहाल की सवारी निकाली जाती है और उन्हें नगर भ्रमण कराया जाता है. महाकाल को उज्जैन का राजा कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि अभी भी यहां उनका ही शासन चलता है.
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