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Shashi Tharoor: कांग्रेस नेता शशि थरूर आजकल अपनी बयानबाजी से लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं. BJP से बढ़ती नजदीकियाँ कांग्रेस के लिए चिंता का कारण बन रही हैं. उन्होंने इस पूरे मामले पर एक हालिया इंटरव्यू में खुलकर बातचीत की है.
Shashi Tharoor News: कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से चार बार के सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं. इसकी वजह उनकी हालिया बयानबाजी और राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें हैं. कहा जा रहा है कि वह अब कांग्रेस में किसी बड़ी भूमिका की मांग कर रहे हैं और उनकी नजर केरल के मुख्यमंत्री पद पर टिकी है. आइए जानते हैं हाल ही में 'इंडियन एक्सप्रेस मलयालम' को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने इस पूरे मामले पर क्या कुछ कहा.
कांग्रेस में असंतोष या नई पारी की तैयारी?
थरूर ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि वह राजनीति में करियर बनाने नहीं आए थे, बल्कि पार्टी के अनुरोध पर इसमें शामिल हुए थे. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका ध्यान हमेशा देश और केरल के विकास पर रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान कांग्रेस नेतृत्व को संकेत देने के लिए दिया गया है कि अगर उनकी भूमिका को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वह कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं.
मुझे कभी भय नहीं रहा
जब थरूर से उनके बदले हुए रुख पर सवाल किया गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'मुझे कभी भय नहीं रहा. मैं करियर बनाने के लिए राजनीति में नहीं आया. मेरा पूरा जीवन संयुक्त राष्ट्र में बीता, कांग्रेस के अनुरोध पर मैंने राजनीति जॉइन की.
भाजपा नेताओं से मेल-मिलाप और कांग्रेस में हलचल
गौरतलब है कि, हाल ही में थरूर को भाजपा के कुछ बड़े नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के साथ देखा गया, जिससे कांग्रेस के भीतर खलबली मच गई. उनकी इन मुलाकातों ने यह अटकलें तेज कर दीं कि वह कहीं भाजपा में शामिल होने की योजना तो नहीं बना रहे? हालांकि, थरूर ने इन कयासों को खारिज करते हुए कांग्रेस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.
केरल की राजनीति में बढ़ती दिलचस्पी
थरूर ने केरल के विकास को लेकर अपनी चिंता जाहिर की और कहा कि राज्य को राजनीति से ऊपर उठकर काम करने की जरूरत है. उनका मानना है कि पिछले डेढ़ दशक में राज्य विकास के मामले में पिछड़ गया है.
राहुल-खरगे कैसे करेंगे डील?
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस आलाकमान के सामने अब यह चुनौती है कि वह थरूर को कैसे संतुष्ट करें. अगर उन्हें पर्याप्त महत्व नहीं मिला, तो क्या वह पार्टी छोड़ देंगे? यह सवाल अब जोर पकड़ रहा है. अब देखना दिलचस्प होगा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं. 28 फरवरी को केरल में एक बड़ी बैठक होनी है. माना जा रहा है कि इस बैठक में यह तय किया जा सकता है कि थरूर को कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी या नहीं.
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