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बिहार की राजनीति में आए नए भूचाल और नीतीश कुमार के दांव के बाद जेडीयू ने आरजेडी के साथ गठबंधन सरकार बना ली है और अब उनका शक्ति परीक्षण 24 अगस्त को होना है.
डीएनए हिंदी: बिहार में जेडीयू नेता नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने एक बार फिर बड़ा राजनीतिक उलटफेर करते हुए NDA से गठबंधन तोड़ आरजेडी महागठबंधन का हाथ थाम लिया और सीएम पद की शपथ भी ले ली है. इतना ही नहीं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने डिप्टी सीएम पद की शपथ एक बार फिर ले ली है. ऐसे में नीतीश कुमार की राजद गठबंधन वाली सरकार के सामने सबसे पहली चुनौती बहुमत साबित करने की होगी और 24 अगस्त को उन्हें बिहार विधानसभा में बहुमत परीक्षण पास करना है.
एक तरफ जहां बिहार की नई सरकार को 24 अगस्त को बहुमत साबित करना है तो दूसरी ओर स्पीकर ने अभी तक इस्तीफा नहीं दिया है जो कि बीजेपी के कोटे से हैं. आरजेडी के विधायकों ने उन्हें स्पीकर के पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव भी दे दिया है लेकिन स्पीकर विजय कुमार सिन्हा अभी भी पद पर बने हुए हैं. उन्होंने कहा है कि सीएम नीतीश कुमार की तरफ से विधानसभा सत्र चलाने की बात कही गई थी जिसके चलते सत्र 24 अगस्त को आयोजित होगा.
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ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि बिहार में विधानसभा सत्र में बहुमत परीक्षण के दौरान एक नया राजनीतिक बवाल भी खड़ा हो सकता है. इसके अलावा बीजेपी भी अंदरखाने नीतीश को नुकसान पहुंचाने की फिराक में है और यह भी माना जा रहा है कि अंत समय तक बीजेपी स्पीकर के साथ मिलकर कोई बड़ा खेल कर सकती है. यही कारण है कि आरजेडी के विधायक स्पीकर को हटाने की मांग कर रहे हैं.
वहीं स्पीकर को हटाने के सवाल पर सीएम नीतीश कुमार से जब उनका पक्ष पूछा गया तो उन्होंने कहा है कि स्पीकर को नियमों का पालन करना चाहिए. ऐसे में अब यह देखना अहम होगा कि बिहार में बहुमत परीक्षण के दौरान क्या राजनीतिक स्थितियां बनती हैं. वहीं यदि नंबर की बात करें तो आरजेडी-जेडीयू के विधायकों की संख्या को मिलाकर आसानी से बहुमत परीक्षण पास किया जा सकता है.
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अहम बात यह है कि कांग्रेस से लेकर जीतन राम मांझी की पार्टी का समर्थन भी नीतीश को मिला हुआ है. इसके चलते नीतीश कुमार की सरकार तो आसानी से बचती देखी जा सकती है लेकिन बीजेपी कभी भी कोई भी खेल कर सकती है जिसके चलते बिहार के राजनीतिक समर में अभी भी काफी कुछ दांव-पेंचों का खेला जाना बाकी माना जा रहा है.
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