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Electoral Bonds का पूरा डेटा SBI ने चुनाव आयोग को सौंपा, SC में दायर हलफनामे में कही ये बात

Electoral Bonds: एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में सौंपे हलफनामे में कहा कि साइबर सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक पार्टियों के बैंक खाते की पूरी संख्या और KYC का डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया है.

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Electoral Bonds का पूरा डेटा SBI ने चुनाव आयोग को सौंपा, SC में दायर हलफनामे में कही ये बात

इलेक्टोरल बॉन्ड पर SBI ने सुप्रीम कोर्ट में दिया हलफानामा

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भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने  गुरुवार को इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral Bonds) का पूरा डेटा चुनाव आयोग को सौंप दिया है. एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर इस बात की जानकारी दी है. SBI ने अपने हलफनामे में कहा कि साइबर सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक पार्टियों के बैंक खाते की पूरी संख्या और KYC के विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.

एसबीआई के चेयरमैन  दिनेश कुमार खारा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने चुनावी बॉण्ड के संबंध में अपने पास मौजूद सारी जानकारी चुनाव आयोग को उपलब्ध करा दी है. उन्होंने उच्चतम न्यायालय में दाखिल हलफनामे में कहा, ‘साइबर सुरक्षा के मद्देनजर राजनीतिक पार्टी का पूरा बैंक खाता नंबर, डोनर्स की KYC डिटेल्स सार्वजनिक नहीं की गई है. हालांकि, तथ्य यह भी है कि ऐसी जानकारी प्रणाली में दर्ज नहीं की जाती है. राजनीतिक दलों की पहचान के लिए ये आवश्यक भी नहीं हैं. 

SBI ने इलेक्टोरल बॉन्ड की क्या-क्या जानकारी की शेयर

  • Electoral Bonds खरीदने वाला के नाम
  • बॉन्ड का यूनिक नंबर और उसकी राशि
  • बॉन्ड कैश करवाने वाली पार्टी का नाम
  • राजनीतिक पार्टी के बैंक अकाउंट के आखिरी 4 नंबर
  • बैंक का ब्रांच कोड और इश्यू करने का स्टेटस
  • एसबीआई की किस ब्रांच से कैश किया गया उसकी भी डिटेल्स

बैंक के चेयरमैन ने कहा कि एसबीआई ने 21 मार्च को चुनाव आयोग को अपने पास मौजूद इलेक्टोरल बॉण्ड के सभी डटा दे दिया है. उनके पास केवाईसी डिटेल और पूरे बैंक खातों के नंबर के अलावा Electoral Bonds से जुड़ी अब कोई जानकारी नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉण्ड से जुड़ी पूरी जानकारी चुनाव आयोग को नहीं देने को लेकर सोमवार को एसबीआई को फटकार लगाई थी. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने 21 मार्च शाम 5 बजे तक बॉन्ड से जुड़े तमाम डेटा को जारी करने का आदेश दिया था. फैसले के मुताबिक, बैंक को बॉन्ड का डेटा चुनाव आयोग को सौंपना था, जिसे आयोग अपनी साइट पर अपलोड़ करेगा, ताकि सभी लोग इसे देख सकें.

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