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कूनो के चीते पहले से थे बीमार या टास्क फोर्स विशेषज्ञों की योग्यता ही कम? सुप्रीम कोर्ट का सीधा सवाल

कूनो नेशनल पार्क में 5 साल की मादा नामीबियाई चीता साशा की गंभीर बीमारी की वजह से मौत हो गई है. अब उसकी मौत पर सवाल उठ रहे हैं.

कूनो के चीते पहले से थे बीमार या टास्क फोर्स विशेषज्ञों की योग्यता ही कम? सुप्रीम कोर्ट का सीधा सवाल

नमीबिया से लाए गए चीतों के स्वास्थ्य पर छिड़ी बहस.

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डीएनए हिंदी: कूनो नेशनल पार्क में सोमवार को नमीबिया से लाए गए चीतों में से एक मादा चीता साशा की मौत हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने चीते की मौत के अगले दिन केंद्र सरकार से चीता टास्क फोर्स में शामिल विशेषज्ञों की योग्यता और अनुभव की जानकारी मांगी है. नमीबिया से भारत लाई गई चीता साशा किडनी की बीमारी से जूझ रही थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है.

जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने केंद्र सरकार से टास्क फोर्ट में शामिल चीता एक्सपर्ट्स की योग्यता और अनुभव के संबंध में दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.  सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा है कि कहीं इन चीतों का स्वास्थ्य पहले से खराब तो नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार की ओर से दायर याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसमें राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के लिए अब एक्सपर्ट्स कमेटी से निशा-निर्देश रोकने की मांग की गई थी कमेटी का गठन सुप्रीम कोर्ट के 28 जनवरी, 2020 को दिए गए एक आदेश पर किया गया था.

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'पैनल में किसी के पास भी नहीं थी विशेषज्ञता'

सीनियर एडवोकेट प्रशांतो चंद्र सेन ने दावा किया था कि पर्यावरण मंत्रालय ने जिस टास्क फोर्स को तैनात किया था, उसके पास एक भी सदस्य ऐसा नहीं था जिसे चीता नियंत्रण में कोई विशेषज्ञता हासिल हो. 

सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञों पर मांग ली रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम एडिशनल सॉलिसिटर-जनरल से अनुरोध करते हैं कि एक शपथ पत्र पर, टास्क फोर्स के सदस्यों की योग्यता और अनुभव के संबंध में, विवरण को रिकॉर्ड करें, यह भी बताएं कि किस सदस्य के पास चीता प्रबंधन में विशेषज्ञता है.

क्या बीमार थे लाए गए चीते?

कुनो नेशनल पार्क में पांच साल की मादा नामीबियाई चीता साशा की कथित तौर पर गुर्दे की गंभीर समस्या के कारण मौत हो जाने के बाद सवाल उठ रहे हैं. वन्यजीव विशेषज्ञ यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या चीता मध्य प्रदेश में अपने नए आवास में स्थानांतरित होने से पहले गुर्दे के संक्रमण से पीड़ित थी या बाद में संक्रमित हो गई थी.

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वन अधिकारियों ने कहा कि 15 अगस्त, 2022 को नामीबिया में परीक्षण किए गए रक्त के नमूनों से पता चला कि भारत आने से पहले साशा को यह बीमारी थी, जिसके बाद से सवाल उठे थे. सवाल है कि अगर साशा पहले से ही गुर्दे के संक्रमण से पीड़ित थी, जैसा कि केएनपी के बयान में दावा किया गया है, तो उसे दुनिया के पहले चीता ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट में शामिल करके भारत क्यों पहुंचाया गया.

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