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विक्की कौशल स्टारर फिल्म 'छावा' और 'कुमकुम भाग्य' जैसे शोज का हिस्सा रहीं संचिता उगले की लाश रविवार को उनके घर में मिली.
मनोरंजन की दुनिया ऊपर से जितनी चमकदार और हसीन दिखती है, उसके पीछे का सन्नाटा और संघर्ष उतना ही डरावना होता है. टीवी और सिनेमा जगत से आई एक बेहद दुखद खबर ने हर किसी को हैरान कर दिया है. 'कुमकुम भाग्य' और 'वागले की दुनिया' जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों में अपनी अदाकारी का हुनर दिखाने वालीं 22 वर्षीय अभिनेत्री संचिता उगले ने 14 जून को मुंबई में अपने घर पर खुदकुशी कर ली.
इस खबर ने एक बार फिर फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में पैर जमाने के लिए जूझ रहे बाहरी कलाकारों यानी आउटसाइडर्स के मानसिक तनाव और अकेलेपन पर बहस छेड़ दी है. संचिता ने कुछ समय पहले ही ग्लैमर वर्ल्ड की कड़वी हकीकत और गॉडफादर न होने के दर्द पर खुलकर बात की थी. उनका वह इंटरव्यू आज उनकी मौत के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे पढ़कर किसी की भी आंखें नम हो जाएं.
संचिता उगले एक प्रतिभावान कलाकार थीं. उन्होंने विक्की कौशल की फिल्म 'छावा' में ताराबाई जैसा दमदार और ऐतिहासिक किरदार निभाया था. इसके अलावा, वह मनोज बाजपेयी जैसे दिग्गज अभिनेता के साथ 'साइलेंस 2' और लोकप्रिय सीरीज 'क्राइम आज कल' में भी नजर आई थीं.
इतने बड़े कलाकारों और प्रोजेक्ट्स से जुड़ने के बाद भी संचिता को मलाल था कि एक आउटसाइडर होने के कारण उन्हें बॉलीवुड में मुख्य भूमिकाएं नहीं मिल पा रही थीं. उनका मानना था कि बिना किसी गॉडफादर या फिल्मी बैकग्राउंड के, सिर्फ काबिलियत के दम पर सही मौके हासिल करना इस इंडस्ट्री में आज भी सबसे बड़ी चुनौती है. ग्लैमर की नगरी मुंबई में खुद को स्थापित करना और रोजमर्रा की जिंदगी के खर्चों को संभालना किसी भी नए कलाकार के लिए बेहद मुश्किल होता है.
संचिता ने अपनी इस व्यावहारिक परेशानी को स्वीकार किया था. उन्होंने बताया था कि फिल्मों में लगातार काम मिलना अनिश्चित होता है, जबकि मुंबई जैसे महंगे शहर में रहने के लिए हर महीने पैसों की जरूरत होती है. यही वजह थी कि फिल्मों का सपना देखने के बावजूद, उन्होंने टीवी सीरियल्स में मिलने वाले लीड रोल्स को स्वीकार करना शुरू किया. वह मानती थीं कि काम चाहे छोटा हो या बड़ा, काम मिलना और सर्वाइव करना सबसे जरूरी है.
अपने संघर्ष के दिनों में भी संचिता के विचार बेहद परिपक्व थे. उन्होंने टेलीविजन इंडस्ट्री के प्रति हमेशा सम्मान जताया. उनका कहना था कि टीवी एक ऐसा निष्पक्ष माध्यम है, जहां नेपोटिज्म या इनसाइडर-आउटसाइडर का भेद नहीं चलता. यहां सिर्फ आपकी मेहनत और कैमरे के सामने आपका हुनर ही आपको टिकाए रख सकता है. संचिता का मानना था कि टीवी ने उन्हें एक्टिंग की बारिकियां सिखाईं और उनका आत्मविश्वास बढ़ाया. हालांकि, उनका अंतिम लक्ष्य हमेशा से बॉलीवुड फिल्मों में अपनी एक अलग पहचान बनाना ही था.
संचिता की बेहद करीबी दोस्त और को-एक्ट्रेस मेघा शर्मा ने उनकी मौत पर कई चौंकाने वाले और भावुक खुलासे किए हैं. मेघा शर्मा ने बताया कि संचिता पिछले काफी समय से डिप्रेशन से जूझ रही थीं और उनका इलाज भी चल रहा था. संचिता अक्सर उनसे बातचीत के दौरान अपनी जिंदगी खत्म करने और सुसाइड करने जैसी बातें किया करती थीं. संचिता कुछ समय से आर्थिक दिक्कतों का भी सामना कर रही थीं, जिससे वह काफी परेशान थीं.
टीवी एक्ट्रेस सिमरन बुधरुप ने संचिता के अचानक चले जाने पर सोशल मीडिया पर गहरा दुख जाहिर किया. संचिता के आखिरी इंस्टाग्राम वीडियो पर कमेंट करते हुए सिमरन ने लिखा, "क्यों संचिता?" उन्होंने अपना गहरा सदमा व्यक्त किया कि आखिर उन्होंने ऐसा कदम क्यों उठाया.
भले ही संचिता के हिस्से में बड़ा संघर्ष आया, लेकिन वे स्वभाव से बेहद सकारात्मक और आभारी इंसान थीं. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि मनोज बाजपेयी, विक्रांत मैसी और विक्की कौशल जैसे मंझे हुए कलाकारों के साथ काम करना उनके लिए किसी एक्टिंग स्कूल का हिस्सा होने जैसा था. वे सेट पर इन दिग्गजों को देखकर बहुत कुछ सीखती थीं.
आज संचिता हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका यह संघर्ष और उनके कहे शब्द पीछे कई अनसुलझे सवाल छोड़ गए हैं. चकाचौंध से भरी इस दुनिया में न जाने कितनी संचिता रोज अपने सपनों को टूटने से बचाने की जंग लड़ती हैं.