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हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आरटीआई एक्टिविस्ट पंकज ने सरकारी टेंडर से जुड़ी जानकारी मांगी थी, लेकिन सरकार ने उन्हें 37,443 पन्नों का जवाब थमा दिया.
हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले से एक बेहद हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने सरकारी विभाग से टेंडर और ठेके से जुड़ी जानकारी मांगी थी. लेकिन उसे न सिर्फ अधिक पैसे देने पड़े, बल्कि आधी-अधूरी जानकारी भी प्राप्त हुई.अब इस मामले में पंकज ने मुख्य सूचना आयुक्त के पास अपील की है. यह मामला सरकार की पारदर्शिता और सूचना अधिकार के मामलों में एक गंभीर सवाल खड़ा करता है.
दरअसल, पंकज नाम के एक एक्टिविस्ट ने जनस्वास्थ्य विभाग से यह जानकारी मांगी थी कि विभाग ने जनवरी 2023 से लेकर जनवरी 2025 तक किस-किस काम के टेंडर जारी किए, कितने ठेकेदारों को लाइसेंस मिला और कितने कर्मचारियों को पक्का या कच्चा रखा गया. इसके अलावा उन्होंने विभाग से कई और सवाल पूछे थे, जैसे कि कितने ठेकेदारों ने जीएसटी भरी, कितने रुपये का काम जिला और सब डिविजन स्तर पर हुआ और कुल कितने रुपये का राजस्व आया.
आरटीआई एक्टिविस्ट पंकज ने 30 जनवरी 2025 को यह जानकारी मांगने के लिए आवेदन किया था. इसके बाद, जब विभाग ने 80 हजार रुपये की फीस के बाद 37,443 पन्नों का जवाब दिया, तो पंकज को कुछ जानकारी नहीं मिली और कई सवालों के जवाब भी अधूरे थे. इस सूचना के जवाब में कई पन्ने गैर जरूरी रिकॉर्ड से भरे हुए थे और बाकी सवालों के जवाब गोल-मोल दिए गए थे. पंकज ने विभाग के इस व्यवहार को लेकर राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की थी. बहरहाल, पंकज का आरोप है कि जो फीस उन्होंने विभाग को दी थी, वह अब तक उनके खाते में जमा नहीं हुई है, जबकि बैंक ने इसकी पुष्टि भी कर दी है.
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