भारत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि 75 वर्ष की उम्र में रिटायरमेंट को लेकर की जाने वाली बातें निराधार हैं. उन्होंने शिक्षा, भाषा, संस्कृति और समाज सुधार पर संघ की भूमिका को विस्तार से रखा.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने 75 वर्ष की उम्र में रिटायरमेंट की चर्चा को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी ऐसा नहीं कहा कि वह या कोई अन्य 75 वर्ष की उम्र में पद छोड़ देगा. अपने संबोधन में भागवत ने शिक्षा, संस्कृति, भाषा, सामाजिक समरसता और अखंड भारत के मुद्दों पर भी विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि संघ समाज के निर्माण में जुटा है और किसी भी तरह की हिंसा से उसका कोई लेना-देना नहीं है.
दरअसल, उन्होंने कहा, “मैंने कभी नहीं कहा कि मैं 75 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त हो जाऊंगा और न ही यह बात संघ में किसी के लिए लागू होती है.” अपने भाषण में भागवत ने शिक्षा व्यवस्था पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि भारत की मुख्यधारा की शिक्षा को गुरुकुल परंपरा से जोड़ना होगा. संस्कृत को आधार मानते हुए उन्होंने कहा कि हर भारतीय को संस्कृत का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए, क्योंकि मूल स्रोतों को समझने के लिए यह आवश्यक है.
संघ और राजनीति के संबंधों पर भागवत ने कहा कि RSS सरकार नहीं चलाता, लेकिन सुझाव जरूर देता है. उन्होंने कहा, “सरकार चलाने में वे एक्सपर्ट हैं और अपने काम में हम एक्सपर्ट हैं. यदि हम ही सब तय करते, तो फैसलों में इतनी देर नहीं होती. समाज और संस्कृति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदू और मुस्लिम अलग नहीं हैं, पूजा-पद्धति में अंतर का मतलब यह नहीं कि वे समाज या संस्कृति से अलग हैं. उन्होंने कहा कि संघ किसी को पराया नहीं मानता, रुकावट अगर आती है तो वह दूसरी ओर से आती है.
इतिहास और प्रेरणा के संदर्भ में भागवत ने कहा कि जितनी प्रेरणा रामप्रसाद बिस्मिल से मिलती है उतनी ही अशफाक उल्ला खान से भी मिलती है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1948 में जयप्रकाश नारायण संघ कार्यालय जलाने चले थे, लेकिन इमरजेंसी के बाद उन्होंने ही संघ के शिक्षा वर्ग में कहा कि परिवर्तन की आशा संघ से ही है.
भाषा विवाद पर उन्होंने कहा कि भारत की सभी भाषाएं राष्ट्रीय हैं, कोई भी क्षेत्रीय नहीं. एक भाषा व्यवहार की होनी चाहिए, लेकिन वह विदेशी नहीं होनी चाहिए. भागवत ने यह भी कहा कि हिंसक संगठन कभी 75,000 स्थानों तक नहीं पहुंच सकता. उन्होंने दोहराया कि RSS व्यक्ति निर्माण के जरिए समाज परिवर्तन पर विश्वास करता है और हिंदुस्थान को हिंदू राष्ट्र मानने के मूल सिद्धांत से कभी समझौता नहीं करेगा.
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