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ED दफ्तर पहुंचे रॉबर्ट वाड्रा, जानें क्या है Shikohpur Land Case जिसमें प्रियंका गांधी के पति पर कसा शिकंजा  

Robert Vadra Summoned: प्रवर्तन निदेशालय की ओर से मिले समन का जवाब देने के लिए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा ईडी दफ्तर पहुंचे हैं. शिकोहपुर जमीन मामले में उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया है.

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ED दफ्तर पहुंचे रॉबर्ट वाड्रा, जानें क्या है Shikohpur Land Case जिसमें प्रियंका गांधी के पति पर कसा शिकंजा  

शिकोहपुर लैंड डील में रॉबर्ट वाड्रा से पूछताछ

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कांग्रेस सांसद के पति और बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें शिकोहपुर जमीन मामले (Sikohpur Land Deal) में पूछताछ के लिए समन भेजा था. दूसरी बार समन भेजे जाने के बाद वह गुरुग्राम के ईडी दफ्तर पहुंचे हैं. उन्होंने इस दौरान कहा कि आज तक हमेशा उन्होंने जांच में सहयोग किया है और सभी सवालों के जवाब दिए हैं. आगे भी सभी सवालों के जवाब देंगे. उन्होंने कहा कि मैंने अब तक हर सवाल का जवाब दिया है. मैं जनता के मुद्दों को मजबूती से आगे भी उठाता रहूंगा. वाड्रा पर हरियाणा ही नहीं राजस्थान में भी जमीन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है. शिकोहपुर जमीन मामले में वाड्रा को 8 अप्रैल को समन भेजा गया था, लेकिन तब वह पेश नहीं हुए थे. दूसरी बार समन भेजने के बाद वह जांच के लिए पहुंचे हैं. 

क्या है शिकोहपुर लैंड डील, जिसमें फंसे प्रियंका गांधी के पति 

प्रवर्तन निदेशालय को शक है कि हरियाणा के शिकोहपुर लैंड डील में रॉबर्ट वाड्रा ने मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए करोड़ों कमाए हैं. बर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड को साल 2008 में तत्कालीन हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम में 3.53 एकड़ जमीन 7.50 करोड़ की कीमत  पर कॉलोनी बनाने के लिए आवंटित की थी. उस समय हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार थी. सरकार ने यह जमीन कमर्शियल कॉलोनी के तौर पर विकसित करने के लिए दी थी. कॉलोनी विकसित करने के बजाय रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी ने इस जमीन को साल 2012 में डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड को 58 करोड़ रुपये में बेच दी थी. 


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प्रवर्तन निदेशालय को आशंका है कि इस डील के जरिए रॉबर्ट वाड्रा ने करोड़ों का मुनाफा कमाया है और इसमें मनी लॉन्ड्रिंग का भी शक है. इससे पहले वाड्रा पर राजस्थान में  भी गैर-कानूनी तरीके से लैंड डील करने का केस चल रहा है. अशोक गहलोत की सरकार में वाड्रा को सरकारी नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों की महंगी जमीन तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर देने का आरोप है.


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कॉलोनी विकसित करने के बजाय रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी ने इस जमीन को रॉ2012 में डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड को 58 करोड़ रुपये में बेच दी और करोड़ों का मुनाफा कमाया था. 

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