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Gurjar Mahapanchayat: एक बार फिर से गुर्जर आरक्षण का मुद्दा भड़क उठा है. आइए जानते है क्या है ये पूरा मामला और क्या है इसका पूरा इतिहास, युवाओं ने क्यों रोकी दिल्ली जाने वाली गाड़ी
Gurjar Mahapanchayat: इस समय राजस्थान में एक बार फिर से गुर्जर आरक्षण का मुद्दा गर्माया हुआ है. राजस्थान के पीलूपुरा (भरतपुर) में आज सुबह 8 बजे गुर्जर समाज की महापंचायत शुरू हुई. इस पंचायत में प्रदेश के विभिन्न लोगों ने भाग लिया. इस महापंचायत में सरकार की तरफ से भेंजे गए मसौदे को पढ़कर सुनाया गया जिसे विजय बैंसला ने पढ़ा. इसके बाद महापंचायत को समाप्त करने का ऐलान हुआ. लेकिन अभी बात खत्म नहीं हुई. इस महापंचायत के फैसले से गुर्जर समाज के युवा नाराज हो गए भारी संख्या में दिल्ली मुंबई रूट पर पहुंचकर ट्रेन रोक दी.
क्यों हो रहा आंदोलन
दरअसल पिछली बार सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने गुर्जरों को ओबीसी कोटे में 5% आरक्षण देने का वादा किया था. लेकिन आंदोलनकारी मानते हैं कि वादा अभी तक पूरी तरह पूरा नहीं हुआ. यही असंतोष अब राजनीति का नया एजेंडा बनता जा रहा है. लेकिन इस बार कठिनाई इसलिए हो रही है क्योंकि पिछली बार की अपेक्षा इस बार इस आंदोलन युवाओं की संख्या बहुत ज्यादा है और ये युवा सोशल मीडिया पर एक्टिव है जो इस मुद्दे को और भी ज्यादा आग दे रहे हैं.
सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं युवा
सोशल मीडिया पर इस बार केवल मुद्दा उठाया जा रहा है बल्कि वे लोग आंदोलन से जुड़े मुद्दे को पोस्ट कर उप नेताओं को टैग कर जवाब भी मांग रहे हैं. इस आंदोलन को लेकर राजस्थान के कुछ प्रमुख इलाके रहे हैं. पीलूपुरा वो इलाका है, जहां कर्नल बैंसला की छवि मजबूत भी रही और छाप भी. दरअसल, साल 2008 में जब गुर्जर आरक्षण आंदोलन भड़का तो पीलूपुरा केंद्र बन गया था. साल 2008, 2010, 2015 और 2019 में गुर्जर आरक्षण आंदोलन के प्रमुख केंद्र पीपलखेड़ा-पाटोली (आगरा रोड़, मेंहदीपुर बालाजी) और मलारना डूंगर (सवाई माधोपुर) और खुशाली दर्रा (खंडार) भी आंदोलन के प्रमुख केंद्र रहे हैं.
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