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हल्दीघाटी के युद्ध पर दिया कुमारी ने ऐसा दावा किया कि लोग इतिहास की किताब खोजने लगे!

राजस्थान की डिप्टी CM दिया कुमारी ने दावा किया है कि हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा प्रताप ने जीता था. उन्होंने कहा कि इतिहास वैसा लिखा गया जैसा मुगलों और ब्रिटिश इतिहासकारों को ठीक लगा. सच बताया ही नहीं गया.उन्होंने दावा किया कि उन्होंनेशिलालेखों में भी बदलाव करवाया है.

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हल्दीघाटी के युद्ध पर दिया कुमारी ने ऐसा दावा किया कि लोग इतिहास की किताब खोजने लगे!

Diya Kumari

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राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े के बाद अब डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने भी इतिहास के तथ्यों को लेकर विवादित बयान दिया है. दिया कुमारी ने महाराणा प्रताप की जयंती के मौके पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा प्रताप ने जीता था. लेकिन इतिहास मुगलों और अंग्रेज़ों के हिसाब से लिखा गया और इसलिए इस सच को छुपाया गया. दिया कुमारी ने ये दावा भी किया कि उन्होंने हल्दीघाटी के शिलालेखों में भी बदलाव करवाया था.

दिया कुमारी ने क्या कहा

दिया कुमारी ने कहा,'हल्दीघाटी में जो शिलालेख था उसमें ये लिखा था कि महाराणा प्रताप युद्ध हार गए थे और अकबर जीत गए थे. वो ASI संरक्षित मॉन्यूमेंट है, 2021 में मैं वहां से सांसद थी. हमने प्रयास किया, दिल्ली तक प्रयास किया, तब संस्कृति मंत्री रहे अर्जुन राम मेघवाल का हमें सहयोग मिला और हमने उस शिलालेख को बदलवाया. अब आप वहां जाएंगे तो आपको लिखा मिलेगा कि हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा प्रताप ने जीता था.'


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क्या हुआ था हल्दी घाटी के युद्ध में?

हल्दी घाटी का युद्ध 1576 में हुआ था. यह युद्ध महाराणा प्रताप और अकबर की सेना के बीच हुआ था. अकबर ने राजा मानसिंह को मेवाड़ भेजा था कि वो संधि करके मुगल साम्राज्य की सरपरस्ती स्वीकार लें. महाराणा प्रताप इसके लिए राज़ी नहीं हुए. राजा मानसिंह और महाराणा प्रताप के बीच भयंकर युद्ध हुआ. इतिहास की किताबों में दर्ज है कि चारों तरफ लाशें बिछी थीं. महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक इस युद्ध में बुरी तरह से घायल हो गया था. इतिहास में लिखा है कि भयंकर युद्ध के बाद महाराणा प्रताप की सेना के जनरलों ने तय किया कि उन्हें युद्ध रोककर लौट जाना चाहिए. इसके बाद उनकी सेना पीछे हट गई थी. इतिहासकारों के मुताबिक, हल्दीघाटी के युद्ध का कोई परिणाम नहीं निकला था. 

उस दौर के इतिहास कारों ने लिखा था कि हल्दीघाटी के युद्ध के परिणाम से अकबर को खुशी नहीं हुई थी. अकबर ने मानसिंह और अपने दूसरे जनरलों को लंबे समय तक अपने दरबार में आने की इजाज़त नहीं दी थी.

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