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राजा रघुवंशी केस में आया ट्विस्ट! आरोपियों ने वापस लिया 'कबूलनामा', मजिस्ट्रेट के सामने गवाही देने से किया इनकार

Raja Raghuvanshi Case Update: राजा रघुवंशी हत्याकांड कई दिनों से चर्चा में बना हुआ है. पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनका बयान ले लिया. लेकिन अब इस मामले में नया मोड़ आया है. आरोपियों ने पुलिस को सामने तो अपना गुनाह कुबूल कर लिया, लेकिन मजिस्ट्रेट के सामने चुप्पी साध ली.

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राजा रघुवंशी केस में आया ट्विस्ट! आरोपियों ने वापस लिया 'कबूलनामा', मजिस्ट्रेट के सामने गवाही देने से किया इनकार
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Raja Raghuvanshi Murder Case: राजा रघुवंशी हत्याकांड में अब नया मोड़ आ चुका है. पुलिस ने बताया कि पिछले महीने मेघालय में सोनम रघुवंशी को उसके पति राजा रघुवंशी की हत्या में मदद करने वाले तीन लोगों में से दो ने अपने पहले के बयान को वापस ले लिया है और मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने खिलाफ गवाही देने से इनकार कर दिया है. शिलांग शहर के पुलिस अधीक्षक और हत्या की जांच कर रहे विशेष जांच दल के प्रमुख हर्बर्ट पिनियाड खारकोंगोर ने कहा कि गुरुवार को जब आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया तो वे चुप रहे तथा कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया.

जांच दल के प्रमुख ने क्या कहा 

श्री खारकोंगोर ने कहा, "हमने आरोपियों में से केवल दो को मजिस्ट्रेट के पास भेजा. वे कोई बयान नहीं देना चाहते थे. हमारे पास उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं. हम एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) की रिपोर्ट का भी इंतजार कर रहे हैं." मामले में मेघालय पुलिस ने पहले दावा किया था कि सभी आरोपियों ने अपना अपराध कबूल कर लिया है. श्री खारकोंगोर ने बताया कि पुलिस द्वारा दिए गए बयान अदालत में स्वीकार्य नहीं हैं. उन्होंने कहा, "अपराध स्वीकारोक्ति बयान न देना उनका अधिकार है, लेकिन भौतिक साक्ष्य भी बहुत महत्वपूर्ण हैं. कोई समस्या नहीं है. हमारे पास मामले में सबूत हैं."

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ऐसी परीस्थिति के क्या हैं नियम 

आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी चुप रहे और गुरुवार को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने पर कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 180 के तहत दर्ज बयान, जांच और जिरह के दौरान अधिकारियों की सहायता करते हैं, लेकिन केवल धारा 183 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज बयान ही अदालत में महत्व रखते हैं. 

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