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राज ठाकरे ने कहा कि मनसे ने अप्रैल 2025 से ही थ्री लैंग्वेज पॉलिसी के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी थी. इसके बाद कई राजनीतिक दल और संगठन भी समर्थन में आ गए.
महाराष्ट्र सरकार ने रविवार को तीन भाषा नीति (थ्री लैंग्वेज पॉलिसी) से संबंधित दोनों सरकारी आदेश (GRs) वापस ले लिए. यह निर्णय तब लिया गया जब राज्यभर में हिंदी को अनिवार्य किए जाने को लेकर तीव्र विरोध देखा गया. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अब इस नीति पर पुनर्विचार के लिए डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक नई समिति बनाई गई है.
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सरकार के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कोई देर से आई समझदारी नहीं, बल्कि मराठी जनभावनाओं के आक्रोश का परिणाम है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पर हिंदी थोपने का बाहरी दबाव था, जो अब भी एक रहस्य है.
राज ठाकरे ने बताया कि मनसे ने अप्रैल 2025 से ही इस मुद्दे को उठाना शुरू कर दिया था. जब पार्टी ने गैर-राजनीतिक मोर्चा निकालने की घोषणा की, तो कई अन्य संगठन और दल भी समर्थन में सामने आए. उन्होंने कहा कि अगर यह मोर्चा निकला होता, तो यह एक सामूहिक महाराष्ट्र आंदोलन का रूप ले सकता था.
राज ठाकरे ने चेतावनी दी कि चाहे नई समिति की रिपोर्ट आए या न आए, लेकिन ऐसी भाषा नीति अब मराठी जनता बर्दाश्त नहीं करेगी. अगर सरकार ने फिर से जबरन नीति लागू करने की कोशिश की, तो वह समिति महाराष्ट्र में काम नहीं कर पाएगी.
इस मुद्दे पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनकी सरकार ने कभी तीन भाषा नीति को मंजूरी नहीं दी थी और सरकार गिरने से पहले रिपोर्ट भी नहीं पढ़ सके थे. वहीं, सीएम फडणवीस ने दावा किया कि नीति की सिफारिशें उद्धव सरकार के दौरान ही मानी गई थीं और रघुनाथ माशेलकर समिति के अनुसार इसे लागू करने के लिए कमेटी बनाई गई थी.
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