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'जब भी मैं खड़ा होता हूं, बोलने नहीं दिया जाता', राहुल गांधी का लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर बड़ा आरोप

राहुल गांधी ने कहा कि पिछले 7-8 दिन में मैंने कुछ भी नहीं बोला. लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की जगह होती है. लेकिन सदन का नजारा देख ऐसे लग रहा है कि जैसे लोकतंत्र बचा ही नहीं.

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'जब भी मैं खड़ा होता हूं, बोलने नहीं दिया जाता', राहुल गांधी का लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर बड़ा आरोप

Rahul Gandhi

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विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर बड़ा आरोप लगाया है. राहुल गांधी ने कहा, 'जब भी मैं सदन में बोलने के लिए खड़ा होता हूं, मुझे बोलने नहीं दिया जाता. जबकि परंपरा यह है कि नेता प्रतिपक्ष खड़ा हो तो उसे बोलने दिया जाए. पता नहीं किस प्रकार सदन चल रहा है. लोकसभा अध्यक्ष की सोच क्या है?' 

राहुल गांधी ने कहा कि पिछले 7-8 दिन में मैंने एक शब्द नहीं बोला. लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की जगह होती है. लेकिन सदन का नजारा देख ऐसे लग रहा है कि जैसे लोकतंत्र बचा ही नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि सदन को अलोकतांत्रित तरीके से चलाया जा रहा है. राहुल गांधी ने यह आरोप इसलिए लगाया कि जब वह बोलने के लिए खड़े हुए तो स्पीकर ने सदन का कार्यवाही स्थगित कर दी.

वहीं, कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने भी आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि जब कोई भाजपा का सांसद या मंत्री बोलता है तो लोकसभा अध्यक्ष उन्हें रोकते-टोकते नहीं हैं. वह कई मिनट तक बोलते चले जाते हैं. लेकिन जैसे ही कांग्रेस या विपक्ष का कोई नेता बोलेगा, स्पीकर कुछ मिनट भी नहीं बोलने देंगे और बार-बार टोकते रहेंगे.

कांग्रेस नेता ने सुषमा स्वराज को क्यों किया याद?

गोगोई ने कहा, ‘जब सुषमा स्वराज जी नेता प्रतिपक्ष थीं तो लोकसभा में उन्हें क्या सम्मान मिलता था, हम सबने देखा है.' हम इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष से मिले और अपनी आपत्ति दर्ज कराई और नेता प्रतिपक्ष की गरिमा की जो अवहेलना हो रही है, उसके बारे में बताया.' उनका कहना था कि लोकसभा अध्यक्ष से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला है.

लोकसभा स्पीकर ने दिया ये जवाब

वहीं, स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी नियमों और सदन की मर्यादा के अनुरूप आचरण का पालन नहीं कर रहे हैं.  बिरला ने शून्यकाल के बाद कहा कि कई पिता-पुत्री, माता-बेटी और पति-पत्नी इस सदन के सदस्य रहे हैं और इसी परिप्रेक्ष्य में नेता प्रतिपक्ष से अपेक्षा की जाती है कि वह सदन के नियमों और परंपराओं के अनुरूप आचरण करेंगे.

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