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नशे से परेशान है पंजाब, 30 लाख से ज़्यादा नशेड़ी, साल भर में 9 हजार मुकदमे और 13 हजार गिरफ्तार

Punjab Drugs Cases 2022: साल 2022 में भी पंजाब के लिए नशे की समस्या काफी गंभीर बनी हुई है. थोड़ी कमी ज़रूर आई है लेकिन नशे का कारोबार खत्म नहीं हुआ.

नशे से परेशान है पंजाब, 30 लाख से ज़्यादा नशेड़ी, साल भर में 9 हजार मुकदमे और 13 हजार गिरफ्तार

Punjab Drugs Smuggling

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डीएनए हिंदी: पंजाब के लिए नशे की समस्या (Drugs Problem of Punjab) दशकों से नासूर बनी हुई है. बीते कुछ सालों में तमाम प्रयासों के चलते कुछ गिरावट ज़रूर हुई है लेकिन अभी भी पंजाब में नशे का कारोबार तेजी से फैल रहा है. 'उड़ता पंजाब' कहे जाने वाले पंजाब में मादक पदार्थो की तस्करी एक बहुचर्चित सामाजिक, आपराधिक और राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है. पंजाब सरकार ने नशे पर काबू पाने के लिए एक एसटीएफ का गठन किया है. इसके बावजूद पंजाब नशे से जुड़े अपराधों के मामले में देश में तीसरे नंबर पर है. पंजाब के 30 लाख से ज़्यादा लोग अभी भी हानिकारक नशे की गिरफ्त में हैं.

इस साल जारी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब अब मादक पदार्थो के इस्तेमाल और तस्करी के मामले में तीसरे स्थान पर आ गया है. रिपोर्ट से पता चला है कि बीते एक साल में एनडीपीएस ऐक्ट के तहत दर्ज 10,432 एफआईआर के साथ उत्तर प्रदेश नंबर 1 पर है. इसके बाद महाराष्ट्र (10,078) और पंजाब (9,972) का नंबर आता है.

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15 प्रतिशत आबादी है नशेड़ी
चंडीगढ़ के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई एमईआर) के सामुदायिक चिकित्सा विभाग की ओर से इस साल जारी की गई किताब 'रोडमैप फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ सब्सटेंस एब्यूज इन पंजाब' के दूसरे संस्करण में कहा गया है कि पंजाब के 30 लाख से ज़्यादा लोग यानी लगभग 15.4 फीसदी आबादी इस समय नशीले पदार्थों का सेवन कर रही है. पंजाब में हर साल करीब 7,500 करोड़ रुपये का ड्रग्स का कारोबार होने का अनुमान है.

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नशे के कारण कई परिवारों ने अपने परिवार के सदस्यों को खोया है. मकबूलपुरा को अनाथों और विधवाओं के गांव के रूप में जाना जाता है, क्योंकि नशीली दवाओं के अधिकांश पीड़ित वहीं से आते हैं. बढ़ती चिंता के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने इस महीने राज्य सरकार को नशीले पदार्थो के खतरे पर नजर रखने और गंभीर होने का निर्देश दिया था. इस साल अगस्त में राज्य भर में संवेदनशील रास्तों पर गश्त करने के अलावा नशा प्रभावित क्षेत्रों में महीने भर की घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाने के बाद पंजाब पुलिस ने 260 शीर्ष अपराधियों सहित 2,205 तस्करों को गिरफ्तार किया.

साल भर में दर्ज हुई 1,730 FIR
इस कार्रवाई के दौरान कुल 1,730 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें से 145 व्यावसायिक मात्रा से संबंधित हैं. पुलिस ने राज्यभर से 30 किलो हेरोइन, 75 किलो अफीम, 9 किलो गांजा और 185 क्विंटल चूरा चूरा, 12.56 लाख टैबलेट/कैप्सूल/इंजेक्शन/फार्मा ओपिओइड की शीशियां भी बरामद की हैं. मारिजुआना हिमाचल प्रदेश के माध्यम से पंजाब में प्रवेश करता है, जबकि अफीम और अफीम की भूसी राजस्थान और मध्य प्रदेश से आती है. गोल्डन क्रीसेंट चौराहे (अफगानिस्तान, पाकिस्तान और ईरान) के पास स्थित होने के कारण इसे 'मौत का ट्राइएंगेल' भी कहा जाता है. यह पंजाब ड्रग गिरोहों के लिए एक आकर्षक बाजार है.

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विडंबना यह है कि पंजाब अफीम, भांग या उनके डेरिवेटिव का उत्पादन नहीं करता है और न ही यह साइकोट्रोपिक दवाओं का निर्माण करता है. पंजाब का 'चिट्टा', एक सिंथेटिक हेरोइन व्युत्पन्न है, जिसने वर्ग, लिंग, आयु और स्थान के लोगों के जीवन को बदल दिया है. पंजाब देश में हेरोइन की कुल बरामदगी का पांचवां हिस्सा है. इस राज्य में राजस्थान के गंगानगर, हनुमानगढ़ जिले और जम्मू-कश्मीर के कठुआ से अफीम की तस्करी की जाती है. हेरोइन की तस्करी पाकिस्तान के जरिए भारत में की जाती है. इस साल अब तक पंजाब पुलिस द्वारा एनडीपीए एक्ट के तहत 9,500 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं और 13,000 को गिरफ्तार किया गया है.

बिना उत्पादन के सबसे नशेड़ी राज्य बन गया है पंजाब
एक अधिकारी ने कहा कि एम्फैटेमिन और एक्स्टसी जैसी सिंथेटिक दवाएं हिमाचल प्रदेश के बद्दी और दिल्ली से आती हैं. 'उड़ता पंजाब' का परिदृश्य इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट एंड कम्युनिकेशंस, चंडीगढ़ के एक अध्ययन में परिलक्षित होता है, जिसमें निष्कर्ष निकाला गया है कि सर्वेक्षण किए गए नशे के 75.8 प्रतिशत सीमावर्ती जिलों में रहते थे और 15-35 वर्ष के बीच की आयु के थे.

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एक दशक से अधिक समय तक कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के बीच राज्य के ड्रग संकट को लेकर आरोप-प्रत्यारोप चलते रहे हैं. इस लड़ाई में बीएसएफ को भी घसीटा गया और 'नार्को पॉलिटिक्स' राज्य की विकृत ड्रग शब्दावली में एक संदर्भ का शब्द बन गया. 2014 में एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी ने दावा किया कि कई राजनेता या तो सीधे या पुलिस समर्थन के साथ अपने साथियों के माध्यम से रैकेट में शामिल थे. आजकल नशाखोर पहचान से बचने के लिए नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं. नशीले पदार्थो को प्याज से लदे ट्रकों में छिपाकर गुजरात से पंजाब भेजा जाता है या गंध को दबाने के लिए जीरे के साथ पैक किया जाता है.

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