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Bhagwant Mann सरकार ने सरकारी दफ्तरों की टाइमिंग बदलने का ऐलान किया है. अब सभी दफ्तर सुबह 7.30 बजे खुलेंगे. इसकी एक अहम वजह बिजली की बचत बताई जा रही है.
डीएनए हिंदी: पंजाब की भगवंत मान सरकार ने सरकारी दफ्तर खुलने और बंद होने के समय को लेकर एक बड़ा फैसला किया है. सरकार ने सरकारी दफ्तरों के खुलने का समय ही बदल दिया है. सरकार द्वारा बदला गया टाइम टेबल आज से लागू हो गया है. इसके तहत अब पंजाब के सभी सरकारी दफ्तर सुबह 7:30 बजे से खुलेंगे और दोपहर दो बजे बंद होंगे. इसे एक बड़ा फैसला माना जा रहा है क्योंकि अभी तक किसी भी राज्य में सरकार ने सरकारी दफ्तरों के टाइम टेबल में इस तरह का बदलाव नहीं किया है.
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बदले हुए टाइम टेबल को लेकर ट्वीट के जरिए जानकारी दी थी. उन्होंने कहा था कि 2 मई से पंजाब में सभी सरकारी कार्यालय सुबह 7:30 बजे से दोपहर 2 बजे तक खुले रहेंगे. मैं खुद सुबह 7:30 बजे अपने कार्यालय जाऊंगा."
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— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) May 2, 2023
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मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि हमारी सरकार द्वारा एक नई पहल की गई है, जिसके कई फायदे होंगे. उन्होंने कहा, "इस पहल में पंजाब के लोगों के सहयोग की उम्मीद करता हूं." दावे ये भी किए जा रहे हैं कि पंजाब सरकार ने यह कदम कदम बिजली की बचत करने के लिए उठाया है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि उनके इस फैसले से सभी सरकारी कर्मचारी भी खुश हैं.
मुख्यमंत्री भगवंत मान स्वयं भी मंगलवार को सुबह-सुबह चंड़ीगढ़ स्थित पंजाब सचिवालय पहुंचे और अपने ऑफिस का काम निपटाने लगे. मुख्यमंत्री ने कहा है कि पंजाब सरकार ने ऑफिस टाइमिंग में बदलाव का फैसला सभी कर्मचारियों से चर्चा करने के बाद लिया है जिस पर कर्मचारियों ने भी अपनी सहमति जाहिर की है.
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अपने इस फैसले के फायदे गिनाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, "आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ने के आसार है. जून-जुलाई में बेहद गर्मी की आशंका जताई जा रही है. ऐसे में लोग अब सुबह-सुबह अपने कामकाज निपटा कर अपने दफ्तरों में जा सकेंगे. 7.30 बजे तक सूरज पूरी तरह से निकल चुका होगा और बच्चों के स्कूलों की छुट्टी अब परिवारों के साथ होगी."
बता दें कि यह फैसला 15 जुलाई तक लागू रहेगा. उसके बाद फिर पुराने 9 से 5 बजे के समय पर दफ्तर खुलने लगेंगे. सरकार ने इस फैसले के पीछे का मकसद बिजली की बचत करना बताया है. मान सरकार का कहना है कि सरकारी दफ्तरों के जल्दी बंद होने से 350 मेगावाट बिजली की खपत कम होगी और बिजली के बिलों में करीब 17 से 18 करोड़ रुपये की बचत की जा सकेगी.
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जानकारी के मुताबिक मान सरकार के इस फैसले के बाद बचने वाली बिजली को इंडस्ट्री और किसानों को सप्लाई किया जाएगा जिससे उद्योग के विस्तार के साथ ही किसानो को राहत मिल सकेगी.
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