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TMC में नहीं लौटना चाहते हैं यशवंत सिन्हा, ये है भविष्य की रणनीति

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कभी बीजेपी के दिग्गज नेताओं में शुमार यशवंत सिन्हा बीते साल मार्च में टीएमसी में शामिल हुए थे. उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बनाया गया था. अब एक बार फिर उनके सियासी भविष्य पर लोग चर्चा कर रहे हैं. पढ़ें प्रीतम सहा की रिपोर्ट.

TMC में नहीं लौटना चाहते हैं यशवंत सिन्हा, ये है भविष्य की रणनीति

पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा. (फाइल फोटो-PTI)

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डीएनए हिंदी: राष्ट्रपति चुनाव 2022 (Presidential Election 2022) खत्म हो गया है. चुनाव हारने के बाद राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रहे यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) ने साफ कर दिया है कि वह अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) में नहीं लौट रहे हैं. जब उनसे सवाल किया गया कि तृणमूल कांग्रेस या किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में वह लौटेंगे या नहीं तो उन्होंने कहा, 'मैंने नतीजों की घोषणा के बाद इस विषय में सोचा. मैं किसी भी राजनीतिक दल में नहीं शामिल हो रहा हूं. मैं बिना किसी राजनीतिक दल में शामिल हुए भी लोगों के साथ रहूंगा.'

यशवंत सिन्हा ने साफ संकेत दिया है कि वह एक बार फिर राष्ट्रीय मंच में वापसी कर रहे हैं. राष्ट्रीय मंच उन्होंने ही बनाया था, अब उसे ही आगे बढ़ाने के बारे में यशवंत सिन्हा सोच रहे हैं. अब उसे किस स्तर पर वह ले जा सकते हैं या नहीं यह देखने वाली बात होगी.

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अब तृणमूल कांग्रेस में वापसी नहीं करेंगे यशवंत सिन्हा

यशवंत सिन्हा पिछले साल मार्च में तृणमूल में शामिल हुए थे. वे पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बने. विपक्ष ने तीन अलग-अलग चेहरों पर विचार किया लेकिन अंतिम सहमति यशवंत सिन्हा के चेहरे पर बनी. यशवंत सिन्हा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह 'बड़े कारणों' से तृणमूल कांग्रेस छोड़ रहे हैं. उनके हारने के बाद राजनीतिक गलियारों में कयास लगने लगे कि क्या यशवंत की टीएमसी में दोबारा वापसी होगी या नहीं. यशवंत सिन्हा ने आज उस संभावना को खारिज कर दिया.

चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने क्या कहा था?

तृणमूल कांग्रेस से भले ही यशवंत सिन्हा की राहें जुदा हो गई हों लेकिन तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी का आभार जताने से वह नहीं चूके. उन्होंने कहा, 'मुझे बंगाल से सबसे ज्यादा वोट मिले. मैंने वहां एक बार भी प्रचार नहीं किया. ममता ने मुझसे कहा कि दूसरे राज्यों पर ध्यान दें. वह पश्चिम बंगाल चुनावों पर ध्यान देंगी.'

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JDS-JMM से खफा-खफा हैं यशवंत सिन्हा

यशवंत सिन्हा को जनता दल (सेक्युलर) की भूमिका रास नहीं आ रही है. यशवंत सिन्हा ने कहा, 'देवगौड़ा और कुमारस्वामी दोनों ने ममता बनर्जी की बुलाई बैठक में हिस्सा लिया था.  उन्होंने विपक्ष से वोटिंग की अपील की लेकिन अंत में आपने मुझे वोट क्यों नहीं दिया, यह समझ में नहीं आता.' यशवंत सिन्हा ने कहा है कि हेमंत सोरेन ने सिर्फ आदिवासी कार्ड की वजह से नहीं बल्कि केंद्रीय जांच एजेंसियों के डर की वजह से भी उन्होंने द्रौपदी मुर्मू का समर्थन किया है.

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यशवंत सिन्हा ने कहा कि अगर अगर शिवसेना नहीं टूटी होती और झारखंड मुक्ति मोर्चा और जेडीएस ने मुझे वोट दिया होता तो मेरा वोट शेयर 45 फीसदी तक पहुंच जाता. इसके बावजूद मुझे जो वोट मिले, वह किसी भी हारने वाले उम्मीदवार से ज्यादा थे. 

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दूसरी ओर, तृणमूल खेमे ने कहा कि ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति चुनाव में विपक्षी दलों को एक छत्र के नीचे लाने की बहुत कोशिश की. केंद्रीय नेतृत्व के समर्थन के बाद भी यशवंत सिन्हा के पक्ष में बहुत वोट डाले गए थे, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है.

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