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राफेल F5 को एक बड़े 'मिड-लाइफ अपग्रेड' के तौर पर विकसित किया जा रहा है. इसे आधुनिक और जटिल खतरों का सामना करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है. राफेल F5 दुश्मन के रडार पर मुश्किल से दिखेगा.
Rafale F5 fighter: फ्रांस ने राफेल लड़ाकू विमानों के सबसे उन्नत संस्करण राफेल F-5 पर काम तेज कर दिया है. जर्मनी के साथ 'नेक्स्ट जेनरेशन फाइटर' प्रोजेक्ट में मतभेद के बाद फ्रांस अब पूरा ध्यान राफेल के इस सबसे उन्नत और शक्तिशाली वर्जन को डेवलप करने पर लगा रहा है. फ्रांस की रक्षा खरीद एजेंसी (DGA) ने डसॉल्ट एविएशन, थेल्स, सफ्रान और एमबीडीए जैसी प्रमुख रक्षा कंपनियों को इसके विकास के लिए शुरुआती अनुबंध सौंप दिए हैं. राफेल F-5 या सुपर-राफेल को 2030 के दशक के मध्य तक फ्रांसीसी वायुसेना में शामिल करने की योजना है. ये खबर भारत के लिए भी अहम है क्योंकि भारतीय वायुसेना को भी कम से कम 24 राफेल F-5 विमान मिलने हैं.
राफेल F-5 फ्रांस का अब तक का सबसे ताकतवर लड़ाकू विमान होगा. इसमें थेल्स का नया RBE2-XG रडार होगा, जो बेहतर डिटेक्शन रेंज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षमताओं से लैस होगा. विमान की स्पेक्ट्रा डिफेंस प्रणाली को पूरी तरह से डिजिटल आर्किटेक्चर में बदला जा रहा है, ताकि वह भविष्य के जटिल खतरों और जैमिंग से निपट सके.
सफ्रान कंपनी इसके लिए नया इंजन विकसित कर रही है. सुपर-राफेल का नया इंजन लगभग 90 किलोन्यूटन (kN) का थ्रस्ट पैदा करेगा. ये वर्तमान इंजनों की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक है. राफेल F-5 'लॉयल विंगमैन' के साथ मिलकर काम करने में सक्षम होगा. इससे परमाणु वॉरहेड वाली मिसाइल भी दागी जा सकेगी.
भारत सरकार भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल जेट खरीदने के बड़े प्रोजेक्ट पर अंतिम मुहर लगाने के करीब है. इसके तहत कुछ जेट सीधे फ्रांस से आएंगे जबकि अधिकांश का निर्माण 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत में किया जाएगा. भारत शुरुआती चरणों में F4 स्टैंडर्ड के जेट हासिल करेगा. माना जा रहा है कि लगभग 90 लड़ाकू विमान F4 स्टैंडर्ड के होंगे जबकि 24 राफेल जेट F5 स्टैंडर्ड के होंगे.
भारतीय वायुसेना फिलहाल 36 राफेल लड़ाकू विमानों का संचालन करती है. ये वायुसेना के सबसे उन्नत जेट हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इन विमानों की ताकत पूरी दुनिया ने देखी है. अब भारतीय वायुसेना 114 अतिरिक्त राफेल शामिल करने की तैयारी कर रही है. पड़ोसी चीन के पास पहले से ही पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान मौजूद हैं. पाकिस्तान भी चीन से पांचवीं पीढ़ी के जेट हासिल करने की कोशिश कर रहा है. जबकि, भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल कोई भी स्टील्थ एयरक्राफ्ट नहीं हैं.
भारत अपना पांचवीं पीढ़ी का एयरक्राफ्ट विकसित कर रहा है लेकिन इसे ऑपरेशनल होने में कम से कम 10 साल का समय लगेगा. ऐसे में भारतीय वायुसेना 4.5 पीढ़ी का दुनिया का सबसे उन्नत लड़ाकू विमान हासिल करने की तैयारी कर रही है. राफेल F-4 और राफेल F-5 भारतीय वायुसेना के सुखोई विमानों के साथ मिलकर लंबे समय तक अग्रिम मोर्चे पर लड़ाकू भूमिका निभाएंगे.