भारत
WHO की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में वायु प्रदूषण से होने वाली 70% मौतें भारत में होती हैं. यह रिपोर्ट भारत के लिए चेतावनी है कि अगर तुरंत सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले सालों में स्थिति और भयावह हो सकती है.
भारत में वायु प्रदूषण एक गंभीर संकट बन चुका है. नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दुनिया में वायु प्रदूषण से होने वाली कुल मौतों में सबसे ज्यादा यानी करीब 70% मौतें भारत में हो रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार, हर साल लगभग 25 लाख लोगों की जान जहरीली हवा से जाती है, जिनमें से 17 लाख 72 हजार मौतें अकेले भारत में होती हैं. ये आंकड़े देश की बिगड़ती हवा और बढ़ते प्रदूषण के स्तर को लेकर गहरी चिंता पैदा करते हैं.
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की साझेदारी में तैयार लैंसेंट काउंटडाउन ऑन हेल्थ एंड क्लाइमेट चेंज रिपोर्ट ने भारत में वायु प्रदूषण की भयावह स्थिति उजागर की है. रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2010 की तुलना में भारत में प्रदूषण से होने वाली मौतों में 38% की बढ़ोतरी हुई है. विशेषज्ञों के मुताबिक, हवा में मौजूद PM 2.5 कण इस समस्या की सबसे बड़ी वजह हैं. PM 2.5 वे सूक्ष्म कण होते हैं जिनका आकार 2.5 माइक्रोन या उससे छोटा होता है. ये कण इतने छोटे होते हैं कि फेफड़ों में गहराई तक पहुंचकर सांस की बीमारियां, दिल की समस्याएं और कैंसर जैसी घातक बीमारियों को जन्म देते हैं.
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रिपोर्ट में कहा गया है कि इन जहरीले कणों के लिए मुख्य रूप से इंसान की गतिविधियां ही जिम्मेदार हैं. वाहनों से निकलने वाला धुआं, कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्र, फैक्ट्रियों का उत्सर्जन, पराली जलाना और घरेलू ईंधन के रूप में लकड़ी या कोयले का प्रयोग, प्रदूषण के बड़े स्रोत हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) से होने वाला प्रदूषण सबसे खतरनाक है. इनसे हर साल करीब 7.5 लाख लोगों की जान जाती है. सिर्फ कोयले से चलने वाले पॉवर प्लांट्स से 2.98 लाख और सड़क परिवहन में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल-डीजल से 2.69 लाख मौतें दर्ज की गई हैं. यह रिपोर्ट भारत के लिए चेतावनी है कि अगर तुरंत सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले सालों में स्थिति और भयावह हो सकती है.
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