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नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने द्विपक्षीय वार्ता की. जानिए सीमा शांति, व्यापार और भारत-चीन संबंधों समेत किन अहम मुद्दों पर बातचीत हुई.
भारत और चीन के रिश्ते अब धीरे-धीरे पटरी पर लौटते नजर आ रहे हैं. शनिवार (12 सितंबर 2026) को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक अहम बैठक हुई. इस बातचीत में दोनों नेताओं का सबसे बड़ा जोर सीमा पर शांति बनाए रखने पर रहा. दोनों ने माना कि अगर रिश्तों को आगे बढ़ाना है, तो एलएसी और सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता सबसे ज्यादा जरूरी है.
लगभग सात साल बाद शी जिनपिंग भारत दौरे पर आए हैं. अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई मुलाकात के बाद से दोनों देशों ने अपने संबंधों को सुचारू बनाने की दिशा में कई कदम उठाए थे, और दिल्ली की इस बैठक ने उस कोशिश को और मजबूती दी है. आपको बताते हैं कि पीएम मोदी और जिनपिंग की इस मुलाकात की मुख्य बातें क्या रहीं.
प्रधानमंत्री मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों के सामान्य विकास के लिए सीमा पर शांति और सुकून का होना बेहद जरूरी है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीमा से जुड़े जितने भी पुराने समझौते और सहमतियां हैं, दोनों पक्षों को उनका ईमानदारी से पालन करना चाहिए.
दोनों नेताओं ने सीमा विवाद का एक ऐसा हल निकालने की प्रतिबद्धता जताई जो निष्पक्ष, तर्कसंगत और दोनों देशों को मंजूर हो. बातचीत में इस बात पर सहमति बनी कि इस मुद्दे को दोनों देशों के लंबे समय के हितों और राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए.
अगस्त 2025 की मुलाकात के बाद से भारत-चीन संबंधों में जो सुधार हुआ है, दोनों नेताओं ने उसका स्वागत किया. उन्होंने इस बात को दोहराया कि दोनों देशों को अपने रिश्तों को एक बड़े और लंबे नजरिए से देखना चाहिए. छोटे-मोटे मतभेदों को कभी भी बड़े विवाद का रूप नहीं लेने देना चाहिए.
प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए तीन मूल मंत्र दिए. उन्होंने कहा कि भारत और चीन के रिश्ते तीन बातों पर टिके होने चाहिए-
आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर भी खुलकर बात हुई. भारत ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे पर अपनी चिंता जताई. दोनों पक्षों ने माना कि एक-दूसरे के बाजारों में आसान और पारदर्शी पहुंच मिलनी चाहिए. साथ ही, सप्लाई चेन से जुड़ी बाधाओं को दूर करने पर सहमति बनी.
दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भारत और चीन को मिलकर काम करना चाहिए और अपने साझा हितों के दायरे को बढ़ाना चाहिए. पीएम मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को चीन द्वारा दिए गए समर्थन और सम्मेलन को सफल बनाने में उसके योगदान की सराहना की.
इसके अलावा बैठक में दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संपर्क, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यापारिक रिश्तों और लोगों की आवाजाही को बढ़ावा देने की जरूरत महसूस की गई. इससे दोनों देशों के आम लोगों के बीच भरोसा मजबूत होगा.
वर्षों के तनाव के बाद यह मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है. अगर सीमा पर शांति का यह वादा जमीनी स्तर पर टिकता है, तो आने वाले समय में दक्षिण एशिया में स्थिरता और आर्थिक मजबूती दोनों देखने को मिल सकती है.
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