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PM बनने के बाद पहली बार RSS मुख्यालय पहुंचें मोदी, आंबेडकर की दीक्षा भूमि में दी श्रद्धांजलि, दो कार्यक्रम के जरिए साधेंगे कई समीकरण 

PM Modi RSS Headquarter Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय नागपुर में रविवार को एक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. यह साल संघ का शताब्दी वर्ष समारोह भी है. समझें इस दौरे के राजनीतिक मायने. 

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PM बनने के बाद पहली बार RSS मुख्यालय पहुंचें मोदी, आंबेडकर की दीक्षा भूमि में दी श्रद्धांजलि, दो कार्यक्रम के जरिए साधेंगे कई समीकरण 

पीएम बनने के बाद पहली बार संघ मुख्यालय जाएंगे मोदी 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के सामाजिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ ही हुई थी. वह संघ के सक्रिय कार्यकर्ता रहने के बाद राजनीतिक जीवन में शामिल हुए. प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम पहली बार आरएसएस (RSS) मुख्यालय नागपुर पहुंचे हैं. यह साल संघ का शताब्दी वर्ष समारोह भी है. नागपुर में संघ के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद पीएम बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की दीक्षा भूमि गए. एक ही दिन में संघ और संविधान निर्माता की दीक्षा भूमि जाने के पीएम के फैसले को एक साथ कई राजनीतिक और सामाजिक समीकरण साधने की युक्ति के तौर पर भी देखा जा रहा है. 

RSS मुख्यालय के दौरे के जरिए कोर वोटर्स को बड़ा संदेश

आरएसएस इस साल अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी का डॉक्टर हेडगेवार स्मृति मंदिर पहुंचना राजनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण है. बीजेपी की चुनावी सफलता में बड़ा हाथ संघ की संगठन क्षमता और विराट हिंदुत्व विचारधारा को भी माना जा रहा है. इस दौरे के जरिए पीएम बीजेपी के कोर वोटर्स को संदेश देने में सफल हैं कि पार्टी जनकल्याण और समावेशी राजनीति के साथ ही हिंदुत्व के अपने एजेंडे पर मजबूती से कायम है.

संघ के कार्यक्रम के बाद देंगे आंबेडकर को श्रद्धांजलि 

आरएसएस के स्मृति मंदिर में कुछ वक्त बिताने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नागपुर में दीक्षा भूमि पहुंचेंगे. यहां पीएम बाबा साहेब को श्रद्धांजलि देंगे. दीक्षा भूमि ही वह जगह थी जहां बाबा साहेब ने बौद्ध धर्म में दीक्षा ली थी. महाराष्ट्र ही नहीं पूरे देश में बीजेपी को पिछले 10 सालों में बड़ी चुनावी सफलता मिली है. इसके पीछे दलित और ओबीसी वोट बैंक भी है. आंबेडकर इस बड़े वोट बैंक के लिए एक कल्ट हीरो की तरह बन चुके हैं. हिंदुत्व के साथ ही समावेशी और समाज के पिछड़े तबके को साथ लेकर चलने की अपनी निष्ठा का सांकेतिक प्रदर्शन के लिहाज से पीएम का यह कदम अहम है.


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