भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज गुजरात दौरे का दूसरा दिन है. उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए आतंकवाद को जड़ से मिटाने की बात कही.
गुजरात के गांधीनगर में पीएम मोदी का 2 किलोमीटर लंबा रोड शो शुरू हो गया है. इस रोड शो में उनके साथ गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी आए. उत्साहित कार्यकर्ता और हजारों लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया. अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैं पिछले दो दिनों से गुजरात में हूं, कल वडोदरा, दाहोद, भुज, अहमदाबाद और आज सुबह गांधीनगर गया. जहां भी गया, ऐसा लगा जैसे देशभक्ति की लहर है. सिंदूर सागर की गर्जना जैसी आवाज है. पीएम मोदी ने जनता को संबोधित करते हुए पहलगाम हमले के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि हम 75 साल से आतंक को सहते आए हैं, लेकिन अब समय आ गया है की ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाए. अब भारत आतंक नहीं सहेगा. अब समय आ गया है कि आतंक के कांटे को निकालकर फेंक दिया जाए. उन्होंने कहा कि हम अपने पड़ोसियों का भी सूख-चैन चाहते हैं. ये हमारा हजारों सालों से चिंतन रहा है, लेकिन जब बार-बार हमारे सामर्थ्य को ललकारा जाए तो ये देश वीरों की भी भूमि है.
पीएम मोदी ने कहा कि शरीर कितना भी सेहतमंद क्यों न हो, अगर कांटा चुभता है तो पूरे शरीर में दर्द होता है. इसलिए हमने तय कर लिया कि उस कांटे को निकालकर ही दम लेंगे. आतंकवादियों ने जब पीओके पर अवैध कब्जा किया, अगर उसी दिन उन मुजाहिद्दीनों को मौत के घाट उतार दिया गया होता तो आज ये हालात न होते. सरदार पटेल चाहते थे कि जब तक पीओके हमें वापस न मिल जाए, सेना वापस नहीं आनी चाहिए, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई. ये मुजाहिद्दीन के मुंह में खून लग गया था. ये सिलसिला 75 सालों से चल रहा है. पहलगाम भी उसी का हिस्सा था. पाकिस्तान के साथ जब युद्ध की नौबत आई, तीनों बार भारत की सैन्य शक्ति ने पाकिस्तान को धूल चटाई है. पाकिस्तान समझ गया कि लड़ाई में वह भारत से जीत नहीं सकता. इसीलिए उसने प्रॉक्सी वॉर का सहारा लिया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "1947 में जब मां भारती का बंटवारा हुआ, 'कटनी चाहिए थी जंजीरें पर कट गई भुझाएं.' देश तीन टुकड़ों में बंट गया. उसी रात कश्मीर में पहला आतंकी हमला हुआ. मां भारती के एक हिस्से पर पाकिस्तान ने मुजाहिद्दीन के नाम पर आतंकियों का इस्तेमाल कर कब्जा कर लिया. अगर उस दिन ये मुजाहिद्दीन मारे जाते और सरदार पटेल की इच्छा थी कि जब तक पीओके हमें नहीं मिल जाता, तब तक हमारी सेना रुके नहीं, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी और अब हम पिछले 75 सालों से आतंकवाद का सामना कर रहे हैं.
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