Advertisement

US-ईरान डील से भारत में आम जनता की बल्ले-बल्ले! जानिए क्या-क्या हो सकता है सस्ता?

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के बादल छंटने और शांति समझौता होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी गिरावट देखी जा रही है.

Latest News
US-ईरान डील से भारत में आम जनता की बल्ले-बल्ले! जानिए क्या-क्या हो सकता है सस्ता?

आम आदमी को मिल सकती है राहत (सांकेतिक तस्वीर)

Add DNA as a Preferred Source

क्या आप जानते हैं कि हजारों किलोमीटर दूर खाड़ी देशों में होने वाली हलचल का सीधा असर आपकी रसोई और मासिक बजट पर कैसे पड़ता है? जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई थी, तब भारत में न केवल पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ, बल्कि दूध, सब्जी से लेकर हवाई टिकट तक के दाम आसमान छूने लगे थे.

हालांकि अब जब दोनों देशों के बीच शांति समझौता होने जा रहा है और युद्ध के बादल छंट रहे हैं, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें तेजी से नीचे आ रही हैं. इसका सीधा फायदा भारतीय उपभोक्ताओं को मिल सकता है. जानिए वे कौन सी मुख्य चीजें हैं, जो आने वाले दिनों में सस्ती हो सकती हैं.

रसोई गैस 

भारत अपनी जरूरत की करीब 60 फीसदी एलपीजी खाड़ी देशों से ही मंगाता है. बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, युद्ध के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रोपेन और ब्यूटेन (जिससे एलपीजी बनती है) के दाम 800 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के पार चले गए थे. अब शांति बहाली के बाद इसके 550-600 डॉलर तक गिरने की उम्मीद है. इससे घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 70 से 100 रुपये तक की बड़ी कटौती देखने को मिल सकती है.

सीएनजी और पीएनजी 

हम अपनी कुल प्राकृतिक गैस की आधी जरूरत कतर और यूएई जैसे देशों से आयात करके पूरी करते हैं. तनाव के कारण गैस की कीमतें 15-18 डॉलर प्रति mmBtu तक पहुंच गई थीं, जो अब घटकर 9-10 डॉलर तक आ सकती हैं. इसका मतलब है कि आने वाले समय में गाड़ियों में डलने वाली सीएनजी और घरों में इस्तेमाल होने वाली पीएनजी के दाम 4 से 6 रुपये प्रति किलो/Scm तक कम हो सकते हैं.

विदेशी फल और ड्राई फ्रूट्स 

भारत हर साल ईरान और आस-पास के देशों से लगभग 90 हजार से 1 लाख मीट्रिक टन खजूर आयात करता है. समुद्री रास्तों में रुकावट आने से थोक बाजारों में कीमिया और मजलूम खजूर 35 से 40 फीसदी तक महंगे हो गए थे. अब सप्लाई चेन दोबारा शुरू होने से इनके दाम 25 से 30 प्रतिशत तक गिरने की उम्मीद है.

खेती की खाद 

भारतीय किसान ओमान और सऊदी अरब से आने वाले यूरिया और फॉस्फेटिक खादों पर काफी निर्भर हैं. युद्ध के कारण प्रति टन आयात लागत 50 से 70 डॉलर बढ़ गई थी. समुद्री रास्ता होर्मुज खुलते ही फर्टिलाइजर कंपनियों की लागत 12 से 15 प्रतिशत कम होगी, जिससे बाजार में खाद की किल्लत खत्म होगी और सरकार पर भी सब्सिडी का बोझ कम होगा.

प्लास्टिक और पैकेजिंग का सामान

भारत का प्लास्टिक उद्योग अपनी जरूरत का 40% प्लास्टिक दाना और पॉलीमर खाड़ी देशों की रिफाइनरियों से मंगाता है. कच्चे तेल के महंगे होने से यह 20% तक महंगा हो गया था. अब क्रूड ऑयल के 75-80 डॉलर के सामान्य स्तर पर आने से पैकेजिंग मटेरियल की कीमतें 15% तक सस्ती हो सकती हैं, जिससे रोजमर्रा के सामानों की पैकेजिंग कॉस्ट घटेगी.

हवाई सफर 

किसी भी हवाई जहाज कंपनी के कुल खर्च का 40% हिस्सा हवाई ईंधन यानी एटीएफ पर जाता है. कच्चे तेल के दाम गिरने से एटीएफ 10% से 12% तक सस्ता हो सकता है, जिसके बाद एयरलाइंस कंपनियां हवाई किराए में 8% से 10% तक की कटौती कर सकती हैं.

पेंट्स और कोटिंग्स

घर की पुताई में इस्तेमाल होने वाले पेंट्स और सॉल्वैंट्स को बनाने में पेट्रोकेमिकल का इस्तेमाल होता है. कच्चे तेल और गैस की कीमतें टूटने से पेंट कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग लागत 6 से 8 प्रतिशत कम हो सकती हैं, जिसका सीधा फायदा ग्राहकों को डिस्काउंट या घटे हुए दामों के रूप में मिलेगा.

ऑनलाइन डिलीवरी और कूरियर सर्विसेज

ईंधन सस्ता होने से माल ढुलाई इंडेक्स में 7 से 10 फीसदी की गिरावट आने की उम्मीद है. इसका सीधा असर जोमैटो, स्विगी, एमेजॉन जैसी फूड और ई-कॉमर्स कंपनियों पर पड़ेगा, जिससे आपकी ऑनलाइन डिलीवरी और कूरियर फीस 5 से 8 प्रतिशत तक कम हो सकती है.

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement