भारत
सोमवार सुबह करीब 5:30 बजे दिल्ली-एनसीआर की भूकंप के तगड़े झटके से लोगों की नींद खुली. अचानक अचानक खिड़कियों के शीशे कांपने और पंखे हिलने लगे और लोग घरों से बाहर की ओर दौड़ पड़े.
सोमवार को सुबह करीब 5.35 बजे दिल्ली-एनसीआर में रिक्टर पैमाने पर 4.0 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र दिल्ली से 2 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है.
कुछ सेकंड तक चले ये झटके इतने शक्तिशाली थे कि दिल्ली से लेकर नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद-फरीदाबाद के आसपास के रिहायशी इलाकों में दहशत फैल गई,. एहतियात के तौर पर कई लोग अपने घरों से बाहर निकल आए. अभी तक किसी तरह के नुकसान या हताहत की कोई खबर नहीं है.
दिल्ली-एनसीआर और उत्तरी भारत भूकंप के प्रति संवेदनशील क्यों हैं हिमालय
दिल्ली-एनसीआर भूकंपीय जोन IV में आता है, जिससे यहां मध्यम से लेकर तीव्र भूकंप आने की संभावना बनी रहती है.
दुनिया की सबसे युवा पर्वत श्रृंखला है, जो इस क्षेत्र की भूकंपीय गतिविधि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. भारतीय टेक्टोनिक प्लेट नेपाली प्लेट के खिलाफ़ दबाव डालती रहती है, यही वह प्रक्रिया है जिसके कारण हिमालय का निर्माण हुआ. उत्तरी भारत और नेपाल में फैला यह टकराव क्षेत्र अत्यधिक सक्रिय रहता है, जिससे दोनों क्षेत्र अक्सर भूकंप के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का लगभग 59% भूभाग अलग-अलग तीव्रता के भूकंपों के प्रति संवेदनशील है. भूकंप के जोखिम के आधार पर देश को चार भूकंपीय क्षेत्रों में बांटा गया है:
जोन V (11%) – सबसे अधिक सक्रिय क्षेत्र
जोन IV (18%) – उच्च जोखिम (दिल्ली-एनसीआर शामिल)
जोन III (30%) – मध्यम जोखिम
जोन II (41%) – सबसे कम सक्रिय
बता दें कि भूकंप पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों में हलचल के कारण आते हैं. ये प्लेटें पृथ्वी की सबसे बाहरी परत के नीचे स्थित होती हैं, जिसे क्रस्ट कहते हैं. जब पृथ्वी की सतह के दो ब्लॉक एक दूसरे के विरुद्ध खिसकते हैं, तो परिणामस्वरूप ऊर्जा निकलती है और भूकंप आता है.
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