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पान मसाला की प्लास्टिक पैकिंग बैन, अब कैसे बिकेगा गुटखा? क्या दाम भी बढ़ेंगे

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब प्लास्टिक और सिंथेटिक पाउच पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है.

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पान मसाला की प्लास्टिक पैकिंग बैन, अब कैसे बिकेगा गुटखा? क्या दाम भी बढ़ेंगे

पान मसाला की पैकिंग बैन (AI Image)

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प्लास्टिक के पाउच में बिकने वाला पान मसाला अब बीते दिनों की बात बनने जा रहा है. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने पान मसाले की पैकिंग को लेकर नियम बहुत सख्त कर दिए हैं. अब पान मसाला बनाने वाली कंपनियों के प्लास्टिक या किसी भी तरह की सिंथेटिक पैकिंग इस्तेमाल करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है.

कब से बदल जाएगी पैकिंग?

FSSAI की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह नियम 10 अगस्त 2026 से पूरे देश में लागू हो गया है. अब से कोई भी कंपनी अपने किसी भी प्रोडक्ट को प्लास्टिक के पाउच या रैपर में नहीं पैक कर सकेगी.

नियमों के तहत इन चीजों के इस्तेमाल पर पूरी तरह बैन रहेगा- 

  • पॉलीएथिलीन और पॉलीप्रोपिलीन
  • पॉलीएस्टर और पीवीसी (PVC)
  • किसी भी प्रकार का सिंथेटिक पॉलिमर या लैमिनेट
  • एल्युमिनियम फॉयल और चमकीली मेटलाइज्ड लेयर

अब किस तरह के पैकेट में मिलेगा पान मसाला? 

प्लास्टिक और फॉयल पर बैन लगने के बाद कंपनियों को अब ऐसे मटेरियल का इस्तेमाल करना होगा जो पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं. FSSAI ने कंपनियों को पैकिंग के लिए कुछ ईको-फ्रेंडली विकल्प दिए हैं, जैसे- कागज या थिक पेपर बोर्ड, सेलूलोज आधारित मटेरियल, टिन के छोटे डिब्बे, कांच की शीशियां या जार. 

इसका मतलब है कि अगली बार जब आप दुकान पर पान मसाला मांगने जाएंगे, तो हो सकता है आपको प्लास्टिक पाउच की जगह कागज की पुड़िया या टिन का डिब्बा थमा दिया जाए.

आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर? 

इस नए नियम का सीधा असर कंपनियों के साथ-साथ आम ग्राहकों की जेब पर भी पड़ने वाला है. प्लास्टिक के मुकाबले कागज, टिन या कांच की पैकिंग काफी महंगी होती है. पैकिंग का खर्च बढ़ेगा, तो कंपनियां इसका बोझ ग्राहकों पर ही डालेंगी यानी पान मसाला पहले से महंगा हो सकता है.

नई मशीनों का खर्च

कंपनियों को अपनी पुरानी पैकिंग मशीनें बदलकर नई तकनीक वाली मशीनें लगानी होंगी, जिससे उनकी लागत काफी बढ़ जाएगी.

क्वालिटी और शेल्फ लाइफ की चुनौतियां 

प्लास्टिक की पैकिंग नमी और हवा को रोककर सामान को लंबे समय तक ताजा रखती है. अब जब प्लास्टिक हट जाएगा, तो कुछ व्यावहारिक दिक्कतें सामने आ सकती हैं.

जल्दी खराब होने का डर

बिना प्लास्टिक के पान मसाले की शेल्फ लाइफ यानी उसके फ्रेश रहने की मियाद कम हो सकती है. सीलन लगने से स्वाद और क्वालिटी बिगड़ने का खतरा रहेगा.

ट्रांसपोर्ट में नुकसान

कागज या कांच जैसी पैकिंग को एक जगह से दूसरी जगह भेजने में टूट-फूट या फटने का जोखिम ज्यादा रहता है, जिससे माल की बर्बादी बढ़ सकती है. सरकार के इस कदम से पर्यावरण को तो बड़ा फायदा होगा ही, लेकिन पान मसाला प्रेमियों को इसके लिए थोड़ा ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ सकता है. 

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