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Who Gave Shelter to Pahalgam Attack Terrorists?: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकवादी हमले की जांच में चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं.
Pahalgam terrorist attack digital evidence revealed: पूरे देश को हिला देने वाले पहलगाम हमले के मामले में अब नई जानकारी सामने आई है. एनआईए की जाँच में खुलासा हुआ है कि पहलगाम आतंकी हमले में सिर्फ़ 3 आतंकी शामिल थे. खुलासा हुआ है कि जिन लोगों ने इन आतंकियों को ठहरने की जगह दी थी, उन्हें सिर्फ़ 3000 रुपये दिए गए थे. इस मामले में जम्मू-कश्मीर में 2 स्थानीय लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. डिजिटल सबूतों से यह सच्चाई सामने आई है.
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की जाँच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. जांच के अनुसार, हमले में सीधे तौर पर केवल तीन आतंकवादी शामिल थे. इन आतंकवादियों को स्थानीय स्तर पर मदद भी मिली थी. इसके लिए उन्हें केवल 3,000 रुपये दिए गए थे. हमले का मकसद ज़्यादा से ज़्यादा दहशत फैलाना और सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया में देरी का फायदा उठाना था.
पहलगाम को निशाना बनाने की वजह यह है कि यह इलाका शहर से दूर, पर्यटकों से भरा और एकांत है. इस बीच, जांच एजेंसी अब आतंकवादी हाशिम मूसा की भूमिका की जांच कर रही है. सूत्रों के अनुसार, हाशिम इस समय घाटी में सक्रिय एक आतंकवादी समूह का सरगना है. एनआईए को शक है कि इस हमले की साज़िश और योजना बनाने में उसकी अहम भूमिका रही होगी.
डिजिटल साक्ष्य से मामले का खुलासा
एनआईए ने आतंकवादियों के पास से कई डिजिटल उपकरण ज़ब्त किए हैं. उनकी फ़ोरेंसिक जांच की जा रही है. इसके अलावा, घटनास्थल से बरामद खाली कारतूस भी उन्हीं हथियारों से मेल खाते हैं जिनका इस्तेमाल आतंकवादियों ने किया था. इन तकनीकी सबूतों से साबित होता है कि हमला बेहद सुनियोजित तरीके से किया गया था.
मदद करने वाले स्थानीय लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया
जांच में पता चला है कि आतंकियों को पनाह देने वाले दो स्थानीय लोगों को इस काम के बदले सिर्फ़ 3,000 रुपये मिले थे. दोनों आरोपियों को एनआईए ने गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है. एजेंसी का मानना है कि स्थानीय मदद के बिना आतंकी इतना बड़ा हमला नहीं कर सकते थे.
पहलगाम को ही क्यों बनाया था निशाना?
पहलगाम एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है जो शहर से दूर है. इसीलिए आतंकवादी इसे निशाना बनाना चाहते थे ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग प्रभावित हों और सुरक्षा बलों को मौके पर पहुँचने का समय मिल जाए. यह रणनीति कारगर रही और हमले के दौरान इलाके में दहशत फैल गई. फिलहाल, एनआईए हाशिम मूसा की भूमिका और डिजिटल सबूतों के आधार पर पूरी साजिश का पर्दाफाश करने में जुटी है. जाँच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं.
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