भारत
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार एक्शन में है. कई फैसले लेते हुए सरकार ने भारत में रह रहे पाकिस्तानियों को वापिस पाकिस्तान लौटने का आदेश दिया है. अटारी बॉर्डर पर कई परिवार अपने प्रियजनों से बिछड़ गए.
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 28 लोगों की जान चली गई. ये हमला भारत के लिए बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला था. आतंकवादियों ने पर्यटकों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं. हमले के बाद से ही भारत सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं. इसी कड़ी में सरकार ने भारत में रह रहे पाकिस्तानियों को देश छोड़ने का आदेश दिया था. मंगलवार को इस आदेश का आखिरी दिन था, वहीं सामान्य वीजा धारकों की समय सीमा 27 अप्रैल तक थी. अटारी बॉर्डर पर जुदाई का मंजर नजर आया. कई लोग अपनों से बिछड़कर हिंदुस्तान से पाकिस्तान जा रहे थे, तो वहीं कई महिलाएं अपने पति से दूर हो रही थीं.
दिल्ली के रहने वाले शहबाज ने बताया कि उनकी शादी दस साल पहले पाकिस्तान की इरम से हुई थी और उनका 9 साल का बेटा है. उनकी पत्नी और बेटा कई साल बाद सात दिन पहले भारत आए थे लेकिन आज दोनों देशों के बीच संबंध खराब होने के कारण उनकी पत्नी को पाकिस्तान जाना पड़ रहा है, क्योंकि उनका पासपोर्ट पाकिस्तान का है और उनके बेटे का पासपोर्ट भारतीय होने के कारण बेटा मेरे पास रहेगा. शहबाज अपने बेटे की परवरिश को लेकर चिंतित है और सरकार से अपील कर रहा है. महिला ने भी कहा, "गलती हमारी तो नहीं है ना? हमें क्यों सजा मिल रही है?"
दरअसल, दिल्ली के रहने वाले रिजवान की शादी हाल ही में पाकिस्तान की नागरिक समरीन से हुई थी. समरीन के पास भी पाकिस्तानी पासपोर्ट है और उसने वीजा अप्लाई भी किया हुआ है, लेकिन नियमों के अनुसार उसे पाकिस्तान वापिस जाना पड़ेगा. समरीन ने रोते हुए बताया कि वह गर्भवती है और अपने पति से दूर नहीं जाना चाहती है, लेकिन पहलगाम घटना के बाद पैदा हुए हालातों के आगे कुछ नहीं किया जा सकता. ये आतंकी हमलों के परिणामों को दर्शाती है, कि हमला तो वो करते हैं लेकिन इसकी सजा आम लोगों को मिलती है. इस शर्मनाक हरकत से न जाने कितने घर टूट गए. लोगों को अपनों से बिछड़ना पड़ा.
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