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Padma Awards 2025: कौन हैं भीमव्वा डोड्डाबलप्पा, जिन्हें 96 साल की उम्र में मिला पद्मश्री अवार्ड

Padma Awards Full List: आज हम आपको 96 बर्ष की कटपुलती कलाकार भीमव्वा डोड्डाबलप्पा के बारे में बताने जा रहे है जिन्हें पद्म श्री पुरुष्कार से सम्मानित किया गया है.

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Padma Awards 2025: कौन हैं भीमव्वा डोड्डाबलप्पा, जिन्हें 96 साल की उम्र में मिला पद्मश्री अवार्ड

Padma Awards Full List

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Padma Awards Full List: देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चार पद्म विभूषण, 10 पद्म भूषण और 57 पद्म श्री पुरस्कारों से राष्ट्र की 72 विभूतियों के सम्मानित किया है. इन 71 हस्तियों में से एक भीमव्वा डोड्डाबलप्पा भी है. इनके साथ सुजुकी मोटर के पूर्व प्रमुख दिवंगत ओसामु सुजुकी, प्रसिद्ध गायक दिवंगत पंकज उधास और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत सुशील कुमार मोदी समेत 71 प्रमुख हस्तियों को सोमवार को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया. इनमें से सबसे ज्यादा चर्चा में भीमव्वा डोड्डाबलप्पा रही है. भीमव्वा डोड्डाबलप्पा एक कटपुतली कलाकार है और उन्हें 96 साल की उम्र में ये पुरुष्कार मिला हैं. 

कौन हैं भीमव्वा डोड्डबलप्पा?
आइए जानते कि कौन है भीमव्वा डोड्डाबलप्पा, दरअसल राष्ट्रपति भवन के भव्य दरबार हॉल में जब भीमव्वा डोड्डाबलप्पा का नाम पद्म श्री के लिए बौला गया तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. 96 वर्षीय कठपुतली कलाकार भीमव्वा डोड्डाबलप्पा शिल्लेक्यथारा को कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. इस मौके पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह समेत अन्य मंत्री भी मौजूद थे. भीमाव्वा डोड्डबलप्पा शिल्लेक्याथरा, कर्नाटक के कोप्पल जिले के मोरनाल गांव की रहने वाली है. 

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70 साल से रामायण, महाभआरत जैसे महाकाव्य को जीवित
जब पैरों में चप्पल पहने और लडखडाते हुए भीमव्वा डोड्डाबलप्पा शिल्लेक्यथारा राष्ट्रपति से पद्मश्री लेने पहुंचीं तो राष्ट्रपति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु प्रोटोकॉल तोड़कर उन्हें सम्मानित करने आई. भीमव्वा डोड्डाबलप्पा शिल्लेक्यथारा कर्नाटक की सदियों पुरानी पारंपरिक कठपुतली कला तोगलु गोम्बेयाटा (Togalu Gombeyaata) की संरक्षक हैं. वे इस कला के माध्यम से  70 साल से अधिक समय से रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों को जीवंत करती रही हैं. तोगलु गोम्बेयाटा कर्नाटक की एक छाया कठपुतली कला है, जिसमें चमड़े से बनी कठपुतलियों का उपयोग कर कहानियों को प्रदर्शित किया जाता है.

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